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भाजपा प्रदेश के नेताओं की जिम्मेदारियां ही तय नहीं कर पाई

राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे  

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भाजपा प्रदेश के नेताओं की जिम्मेदारियां ही तय नहीं कर पाई

भाजपा प्रदेश के नेताओं की जिम्मेदारियां ही तय नहीं कर पाई

जयपुर। प्रदेश में ठीक छह माह बाद नई सरकार का गठन हो जाएगा। चार माह बाद कभी भी विधानसभा चुनाव आचार संहिता लग जाएगी। ऐसे में प्रदेश के बड़े राजनीतिक दल भी चुनावी तैयारियों में जुट चुके हैं। वर्तमान में जो हालात हैं। उसमें भाजपा के मुकाबले कांग्रेस लगातार चुनावी तैयारियों में आगे दिखाई दे रही है। भाजपा अभी तक यह ही तय नहीं कर पाई है कि प्रदेश के किन नेताओं को चुनावों में क्या जिम्मेदारी मिलेगी?

प्रदेश में कांग्रेस सरकार है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार नई-नई घोषणाएं कर जनता को आकर्षित करने में जुटे हैं, वहीं भाजपा अभी तक प्रदेश में न तो कोई चेहरा तय कर पाई है और न ही किसी बड़े मुद्दे पर सरकार को घेरने की मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। हालांकि प्रदेश भाजपा का यह काम केंद्रीय नेतृत्व जरूर कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार प्रदेश के दौरे कर रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी भरतपुर आ चुके हैं, उदयपुर में आने का कार्यक्रम बन गया है।

इन चेहरों की दिशा तय होगी या नहीं हो रहा इंतजार

वसुंधरा राजे: 2013 से 2018 में मुख्यमंत्री थीं। इसलिए राजे के चेहरे पर ही पिछला चुनाव लड़ा था। चुनाव के बाद उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया गया। अब राजे को इस चुनाव में जिम्मेदारी दी जाएगी या नहीं। यह सवाल अभी तक बना हुआ है।

गजेन्द्र सिंह शेखावत: 2018 के चुनाव से पहले चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक बनाया था। लेकिन अभी तक उन्हें राजस्थान चुनाव से जुड़ी कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

अर्जुन राम मेघवाल: केंद्रीय मंत्री मेघवाल का केंद्र में लगातार कद बढ़ रहा है, लेकिन राजस्थान चुनावों में उनकी क्या भूमिका रहेगी। यह भी अभी तय नहीं हुआ है। 2018 में उन्हें चुनाव प्रबंधन समिति का सह संयोजक बनाया गया था।

भूपेन्द्र यादव: केंद्र सरकार में मंत्री हैं। 2018 के चुनाव में यादव अंदरूनी रूप से प्रदेश के चुनाव में पूरी दखल रख रहे थे। इस बार चुनावी कामकाज की जिम्मेदारी नहीं मिली है।

ये अभी भी सक्रिय भागीदार

राजेन्द्र राठौड़: 2018 के चुनाव में घोषणा पत्र इन्हीं के नेतृत्व में बनाया गया था। पार्टी ने इन्हें वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष बना रखा है।

चन्द्रशेखर: भाजपा ने 2018 के चुनाव से पहले चंद्रशेखर को संगठन महामंत्री बनाया था। वे अभी भी इसी भूमिका में हैं।

ये पहली बार बड़ी भूमिका में

सी.पी. जोशी: चित्तौड़गढ़ से दूसरी बार सांसद हैं। हाल में प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से साफ कर दिया गया है कि जोशी के अध्यक्ष रहते हुए ही प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा।

कांग्रेस इसलिए दिख रही आगे
राजस्थान कांग्रेस में चेहरे को लेकर किसी तरह का संकट नजर नहीं आ रहा। कांग्रेस की प्रदेश में सरकार है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के रूप में बड़ा नाम उनके पास है। सरकार होने के चलते लगातार बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं। फ्री हैंड होने कारण खुद ने सारी कमान संभाली हुई है। संगठन की कमान गोविंद डोटासरा के पास है। गुटबाजी थामने के लिए भी बहुत कोशिशें पार्टी में हो चुकी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर सचिन पायलट थे, वहीं नेता प्रतिपक्ष के पद पर रामेश्वर डूडी थे। पायलट के पास फिलहाल संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं है, वहीं सत्ता में डूडी की भागीदारी है।

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