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गणतंत्र दिवस: रिश्तों की कमजोर डोर को मिला कानून का मजबूत सहारा, बुजुर्गों से लेकर बेटियों तक, अधिकारों की ढाल बने ये सख्त नियम

Republic Day 2026: हमारा गणतंत्र ऐसे दौर में है, जहां रिश्तों की डोर कमजोर पड़ रही है। माता-पिता, बेटियां, बहुएं और नाबालिगों को सुरक्षा देने के लिए कानून मजबूत सहारा बने हैं। वरिष्ठ नागरिक संरक्षण, पीसी-पीएनडीटी, घरेलू हिंसा, पॉक्सो, संपत्ति अधिकार, चेक बाउंस जैसे कानून समाज को संबल दे रहे हैं।

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Republic Day 2026

Republic Day 2026 (Photo-AI)

Republic Day 2026: जयपुर: हमारा गणतंत्र आज ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां भरोसे और आत्मीयता से बंधी रिश्तों की मजबूत डोर कमजोर होती दिख रही है। मां-बाप, भाई-बहन, मां-बेटी, पति-पत्नी और शिक्षक-छात्रा जैसे कमजोर पड़ते रिश्तों को सहारा देने के लिए हमको कानून लाने पड़े, जो समाज को मजबूती से सहारा दे रहे हैं।

राष्ट्रीय अपराध नियंत्रण ब्यूरो (एनसीआरबी) और संसद में पेश होते रहे आंकड़े यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि रिश्तों की डोर को मजबूत सहारा देने में इन कानूनों की प्रमुख भूमिका है। इन आंकड़ों के आधार पर संसद और विधानसभाओं से लेकर अदालतों तक सामाजिक रिश्तों में इन कमजोरियों पर चिंता भी जाहिर की जाती रही है।

कानून- वरिष्ठ नागरिक संरक्षण: 2007 में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम

क्यों लाया गया: 60 वर्ष से अधिक आयु के माता-पिता और घर के अन्य वरिष्ठ नागरिकों को संरक्षण मिले।

प्रावधान: उपखंड मजिस्ट्रेट न्यायालय को अधिकार दिया गया है कि वह संतान से भरण-पोषण दिला सकता है। वहीं, भरण-पोषण न देने या वरिष्ठ नागरिकों को प्रताड़ित करने पर जेल।कानून- बेटियों की रक्षा: 1994 में पीसी-पीएनडीटी अधिनियम

इससे लिंगानुपात में सुधार आ रहा है, जिसके अधिकृत आंकड़े जनगणना-2027 में सामने आएंगे।
क्यों लाया गया: कन्या भ्रूण हत्या के बढ़ते मामलों के कारण लिंगानुपात में लगातार गिरावट।
प्रावधान: चिकित्सकों के लिंग परीक्षण पर रोक लगाई गई और सजा का प्रावधान किया गया। कन्या भ्रूण हत्या के मामलों में राजस्थान में विशेष न्यायालय बनाए।

कानून- बहुओं की सुरक्षा: घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005

क्यों लाया गया: महिलाओं खासकर बहुओं के साथ घरेलू हिंसा की शिकायतें।
प्रावधान: घरेलू हिंसा का शिकार महिलाओं को घर में रहने का अधिकार, प्रताड़ना मामलों में सजा।

कानून- बेटियों की सुरक्षा: पॉक्सो अधिनियम, 2012

क्यों लाया गया: नाबालिग बेटियों के साथ यौन प्रताड़ना के बढ़ते मामलों को रोका जा सके। इनमें स्कूलों में बालिकाओं के साथ शिक्षकों के यौन हिंसा करने या अश्लीलता के प्रकरण भी शामिल।
प्रावधान: आजीवन सजा और कुछ परिस्थितियों में मृत्युदंड।

कानून- संपत्ति में बेटियों का हक: 2005 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन

क्यों लाया गया: बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटों के समान ही अधिकार दिलाने।
प्रावधान: बेटियां पिता के निधन के बाद संपत्ति में हक पाने के लिए कानूनी कार्रवाई का अधिकार।

कानून- आर्थिक भरोसा: एनआई एक्ट में संशोधन कर धारा-138 में सजा का प्रावधान

क्यों लाया गया: मित्रों और रिश्तेदारों के बीच भरोसे के आधार पर होने वाले लेन-देन में विश्वास के तौर पर दिए जाने चेक के बाउंस होने के मामले बढ़ने लगे। चेक के प्रति भरोसा कायम रखने के लिए यह प्रावधान।
प्रावधान: चेक बाउंस के मामलों में सजा।

इन मामलों में राजस्थान ने की पहल

मृत शरीर के अंतिम संस्कार के लिए बाध्यता- लोग मृत शरीर को रखकर मांग मंगवाने के लिए दवाब बनाते हैं। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए राजस्थान में हाल ही कानून लाया गया।

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