
जयपुर। अजमेर , अलवर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा में हुई बीजेपी की हार के बाद राजस्थान से लेकर दिल्ली तक हलचल मची हुई है और इस बार से पार्टी आलाकमान खासा चिंतित है। सत्ता-संगठन ने दो दिन बैठकें कर हार की समीक्षा की और तय किया कि जल्द ही सत्ता-संगठन में बदलाव किया जाएगा। भाजपा निष्क्रिय मंडल अध्यक्ष से लेकर प्रदेश पदाधिकारी तक हटाएगी और नए नेताओं को मौका दिया जाएगा। इसी तरह सरकार मंत्रिमण्डल में भी फेरबदल कर ऐसे मंत्रियों को हटा सकती है, जिनका कोई विशेष योगदान सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने में नहीं रहा है।
ऐसे में पार्टी की हार के बाद पार्टी के ही भीतर उठने लगे नेतृत्व परिवर्तन के सवालों पर भाजपा एमएलए प्रहलाद गुंजल और भवानी सिंह राजावत ने सिरे से नकारा है। कोटा से आने वाले दोनों ही विधायकों की माने तो हार जरूर हुई है लेकिन इसके लिए नेतृत्व परिवर्तन की नहीं बल्कि कार्यशैली में बदलाव और सुधार की आवश्यकता है।
दोनों ही विधायकों ने राजस्थान विधानसभा में मीडिया से यह बात कही। विधायक भवानी सिंह राजावत कहा कि, हार के विश्लेषण का काम हाईकमान का है और वो किया जा रहा है। इसके बाद हाईकमान को ही तय करना है कि परिवर्तन किया जाए या नहीं। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में परिवर्तन से ज्यादा कार्यशैली में सुधार की जरूरत है।
वहीं दूसरी ओर, विधायक प्रहलाद गुंजल के अनुसार, हार के बाद अब नेतृत्व परिवर्तन की बात करना बेकार है और समझदारी इसी में है कि बचे हुए इस कम समय में सब मिलकर आगे की तैयारी करें जिससे आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी को जीत मिल सके।
विधायक घनश्याम तिवाड़ी शुरु से ही सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं और अब वे और ज्यादा उग्र हो गए हैं। वहीं नरपत सिंह राजवी भी सरकार को खरी-खरी सुनाने में पीछे नहीं रहते। विधायकों में करीब तीस विधायक ऐसे भी हैं, जो अन्दर ही अन्दर सरकार के खिलाफ हैं।
Published on:
06 Feb 2018 01:56 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
