
Black gold started swaying in the fields
जयपुर
भीलवाड़ा, कोटा, झालावाड़, चित्ताैड़ सहित कई जिलों में तो अफीम की खेती का होना आपने सुना होगा। लेकिन अब जयपुर शहर और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी अफीम की खेती होने लगी है। कमाई के चक्कर में किसान अब अफीम के तस्कर बनते जा रहे है। यहीं कारण है किसानों ने अपने खेतों पर चोरी छिपे रुप से अवैध रुप से अफीम के पौधों को बो रखा है। जयपुर की कमिश्नरेट पुलिस और जयपुर जिला ग्रामीण पुलिस ने इस मार्च के माह में करीब आधा दर्जन कार्रवाई को अंजाम देकर खेतों में अवैध रुप से खेती कर रहे नशे के सौदागरों का पर्दाफाश किया हैं। इस माह सात दिन में ही पुलिस ने कार्रवाई को अंजाम देते हुए खेतों में अवैध रुप से उगाए गए 1 लाख 4 हजार 189 पौधे पकड़े है जिनमें करीब तीन हजार किलो अफीम थी।
ऐसे खुलता गया अवैध खेती का खेल
मार्च माह की शुरूआत के साथ ही जयपुर ग्रामीण पुलिस ने पहली कार्रवाई की। सूचना मिलने पर पुलिस ने अवैध नशे की खेती के खिलाफ कार्रवाई को अंंजाम दिया। पुलिस ने जोबनेर थाना क्षेत्र के भोजपुरा खुर्द में कार्रवाई करते हुए खेत में अवैध रुप से हो रही अफीम की खेती को पकड़ा। जहां खेत से अफीम के 24 हजार 708 पौधे मिले। जिनका वजन 154 किलो 800 ग्राम निकला।
सरसों की खेती की आड़ में अफीम
आंधी थाना क्षेत्र में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सरसों की खेती की आड़ में हो रही अफीम की खेती का पर्दाफाश किया। यहां एक किसान ने सरसों के खेत में आड़ में 60 वर्ग मीटर में अफीम की अवैध रुप से खेती कर रखी थी। इस खेत से अफीम के 682 पौधे जिनका वजन 110 किलोग्राम था उन्हें जब्त किया। वहीं यहीं पास ही मौजूद दूसरे खेत पर भी कार्रवाई की गई। इस खेत में भी 0.4 हेक्टेअर भूमि में उगाई गई अफीम की खेती को पकड़ा। जहां से 78 हजार 647 पौधों को बरामद किया गया। जिनका वजन 1829 किलोग्राम था। दोनों जगह पर अफीम के कुल 79 हजार 329 पौधे जब्त किए गए।
मंदिर से 120 पौधे बरामद
वहीं जयपुर कमिश्रनेट पुलिस ने भी कार्रवाई करते हुए शास्त्री स्थित एक मंदिर से अवैध रुप से उगाए गए 120 पौधे अफीम के बरामद किए। वहीं यहां से 32 गांजे के पौधे भी मिले है। यहां मंदिर में रह रहा पूजारी यह खेती कर रहा था।
काला सोना है अफीम
अफीम को काला सोना कहा जाता है। प्रदेश भर में इस बार करीब 35 हजार काश्तकारों को अफीम की खेती के लिए पट्टे दिए गए है। जहां पर किसान अफीम की खेती कर रहे है। अफीम की खेती हर कोई किसान नहीं कर सकता है। अफीम को खेत में उगाने से पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। जिसमें नारकोटिक्स विभाग से लेकर प्रशासन तक की अनुमति लेनी होती है। इसके बाद खेत की नाप के आधार पर किसानों को पट्टे वितरित किए जाते है। किसान के फसल बोने के बाद केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम खेतों में पट्टों की जांच करती है और उन्हें नापती है। जयपुर में अफीम की खेती के लिए किसी भी किसान को अनुमति नहीं दी गई है।
कहां से आता है बीज
पुलिस का कहना है कि अफीम की फसल बोने के लिए बीज भी उन्हें ही दिया जाता है जिन किसानों को खेती की अनुमति दी जाती है। लेकिन पुलिस को यह समझ नहीं आ रहा है कि जयपुर में अफीम का बीज कहां से आ रहा है। माना जा रहा है कि जिन जिलों में अफीम की खेती होती है वहीं के बीज व्यापारियों से यहां के किसान सांठ गांठ कर अफीम के बीज लेकर आते है।
लालच में किसान बन रहे तस्कर
पुलिस का कहना है कि अफीम बहुत महंगी बिकती है। एक किलो अफीम की कीमत बाजार में लाखों रुपए किलो तक है। ऐसे में किसान ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में तस्कर बनता जा रहा हैं।
जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में कई इलाकों में हो रही खेती
जयपुर जिला ग्रामीण पुलिस को मिली शिकायतों के आधार पर पता चला है ग्रामीण क्षेत्र के कई गांवों में यह खेती हो रही है। हालांकि पुलिस अभी शिकायतों को तस्दीक करने पर जुटी है। जयपुर जिला ग्रामीण एसपी शंकरदत्त शर्मा का कहना है कि पुलिस की लगातार उन किसानों पर नजर है जो इस अवैध धंधे में लिप्त हो गए है। पुलिस उन पर कार्रवाई करेगी किसी भी हाल में अफीम की खेती मिलने पर बख्शा नहीं जाएगा।
Updated on:
08 Mar 2020 03:58 pm
Published on:
08 Mar 2020 10:18 am

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