
फायर सेस का पैसा जमा कराने में निकाय, प्राधिकरण कर रहे हैं आनाकानी
जयपुर।
बहुमंजिला इमारतों की स्वीकृति के बदले प्रदेशभर के विकास प्राधिकरण, नगर सुधार न्यास और शहरी निकाय फायर सेस की वसूली कर रहे हैं, लेकिन यह पैसा सरकार को देने में आनाकानी की जा रही है। जिसकी वजह से अग्निश्मन व्यवस्था को मजबूत करने में सरकार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने पूरे प्रदेश से वसूल की गई फायर सेस की राशि एक जगह एकत्र करने के लिए एक बैंक में केंद्रीयकृत खाता खोला था ताकि निकाय सेस का पैसा इस खाते में डाले। राज्य सरकार ने 23 दिसंबर 2019 को सभी प्राधिकरण, नगर सुधार न्यास और शहरी निकायों को आदेश दिए कि सभी निकाय फायर सेस की वसूली राशि इस खाते में जमा कराए। जब निकायों ने सरकार की नहीं सुनी तो स्वायत शासन विभाग और नगरीय विकास विभाग ने 19 मार्च और 7 मई 2020 को दोबारा आदेश जारी कर पैसा जमा कराने के लिए सख्त हिदायत जारी की, लेकिन पांच महीने में तीन आदेश जारी करने के बावजूद फायर सेस की राशि केंद्रीकृत खाते में जमा नहीं कराई है।
एसीएस को देने पड़े हैं आदेश
मजबूरन नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव भास्कर सावंत और स्वायत्त शासन विभाग के सचिव भवानी सिंह देथा की ओर से संयुक्त रूप से पत्र जारी कर पैसा खाते में जमा कराने के आदेश दिए गए हैं। शहरों में 15 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई की इमारतों के निर्माण की स्वीकृति देते समय निर्माणकर्ता से फायर सेस की वसूली की जाती है। वसूले गए फायर सेस की राशि को शहरों की अग्निशमन व्यवस्था सुदृढ़ करने में खर्च करना होता है।
ताकि एक खाते में आसानी जमा हो सके पैसा
फायर सेस की वसूली के मौजूदा सिस्टम में इन खामियों के चलते राज्य सरकार ने नया सिस्टम लागू किया था। ताकि फायर सेस की राशि का केंद्रीकृत तरीके से उपयोग किया जा सके। मगर प्राधिकरण, नगर सुधार न्यास और शहरी निकायों की लापरवाही किस तरह से इस सिस्टम को लागू नहीं होने दे रही है। इस राशि के उपयोग से ऐसे छोटे-छोटे निकायों में भी अग्निशमन संसाधन उपलब्ध कराए जाने हैं, जहां फायर सेस बहुत कम मिलता है।
Published on:
10 Jun 2020 05:35 pm
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