जयपुर. बहुत अजीब दौर है यह, जब नई पीढ़ी बहुत जल्द पुरानी हो जाती है और पुरानी पीढ़ी को महज तभी तक काम का समझा जाता है, जब तक कि वह सिक्कों की खनखन जुटा सके और जब ऐसा होता है, तो सिक्कों की धुन पर न केवल ‘राग मारवा’ जैसी कहानी सामने आती है, बल्कि इसी नाम से एक पूरा का पूरा कहानी संग्रह हमारे सामने होता है, जो बदलते वक्त की बनती-बिगड़ती धुनों को सामने रखने की कोशिश करता है, बता दें कि यह कोशिश ममता सिंह की है।