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कळपने के लिए बिक रही रामायण, गीता, पंचांग व व्रत-त्योहार की पुस्तकें

मकर संक्रांति पर दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है।

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जयपुर

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Girraj Prasad Sharma

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Girraj Prasad Sharma

Jan 10, 2026

गिर्राज शर्मा
जयपुर .
मकर संक्रांति पर दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन महिलाएं 14-14 वस्तुएं कळप कर दान करती है। इसे लेकर बाजार में इनदिनों कळपने की वस्तुओं की खूब बिक्री हो रही है। इस बार अन्य वस्तुओं के साथ श्रीरामचरित मानस, श्रीमद्भागवत गीता सहित अन्य धार्मिक पुस्तकें भी बाजार में बिक रही है।

बाजार में पंचांग, श्रीरामचरित मानस, श्रीमद्भागवत गीता, व्रत-त्योहार की पुस्तकें भी दान के लिए बिक रही है। धार्मिक पुस्तक विक्रेताओं ने इसके लिए 14-14 पुस्तकों के पैकेट भी तैयार रख रखे हैं। हालांकि बाजार में 20 रुपए से लेकर 150 रुपए तक ही धार्मिक पुस्तकें अधिक बिक रही है। धमाचार्यों व ज्योतिषियों की मानें तो इस बार मकर संक्रांति एकादशी के दिन आने से महिलाएं धार्मिक पुस्तकों को कळपने में प्राथमिकता दे रही है। वहीं तुलसी व रुद्राक्ष की मालाएं भी बिक रही हैं।

पुरोहितजी का कटला में उमड़ रही भीड़

मकर संक्रांति पर दान-पुण्य के लिए 14-14 वस्तुएं खरीदने के लिए बाजार में भीड़ उमड़ रही है। खासकर बड़ी चौपड़ पर पुरोहितजी का कटला, नाहरगढ़ रोड, चांदपोल बाजार, त्रिपोलिया बाजार में दुकानों व प्रतिष्ठानों पर महिलाओं की भीड़ दिखाई दे रही है। व्यापारियों ने भी 14-14 वस्तुओं के पैकेट तैयार कर रखे हैं। इनमें सुहाग की वस्तुओं के साथ घर में काम आने वाली चीजें अधिक बिक रही है।

कितने की बिक रही धार्मिक पुस्तकें (प्रति पुस्तक)

पुस्तक - कीमत

रामचरित मानस - 80 से 400 रुपए
श्रीमद्भागवत गीता - 20 से 120 रुपए
पंचांग - 100 से 150 रुपए
व्रत-त्योहार की पुस्तकें - 50 से 150 रुपए

पुण्यकाल सुबह 8.43 बजे से शुरू

14 जनवरी को सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 3 बजकर 07 मिनट पर होगा, इसके साथ ही मकर संक्रांति शुरू होगी। हालांकि इससे पहले ही सुबह 8 बजकर 07 मिनट से पुण्यकाल शुरू हो जाएगा, जो सूर्यास्त तक रहेगा। इस बीच महिलाएं कळपना दान करेंगी।

इस बार मकर संक्रांति के दिन एकादशी है, ऐसे में कळपने के लिए रामायण की पुस्तकें लेकर आए हैं। रामायण पाठ से घर में सुख-समृदि्ध आती है, इससे पुण्य मिलेगा।
- रेणु शर्मा, उनियारों का रास्ता

मकर संक्रांति पर कळपने के लिए पहले पंचांग अधिक बिकते थे, पिछले 2-3 साल से धार्मिक पुस्तकें कळपने का चलन बढ़ा है। इस बार कॉलोनियों में दुकानदार भी बेचने के लिए रामायण, श्रीमद्भागवत गीता, व्रत-त्योहार की पुस्तकें लेकर गए हैं।
- रामचरण नाटाणी, धार्मिक पुस्तक विक्रेता

मकर संक्रांति दान का विशेष महत्व है। धार्मिक पुस्तकें दान करने से सतोगुण की वृद्धि होती है, साथ ही दान लेने वाले को आध्यात्मिकता की ओर ले जाती है। इससे अनाचार व अपराधों का शमन होता है। इसका फल दान देने वाले को भी मिलता है।
- स्वामी अवधेशाचार्य

मकर संक्रांति पर कोई भी वस्तु दान देने का पुण्य मिलता है। शास्त्रों में 14 वस्तुओं के दान का विधान है। पंचांग या धार्मिक पुस्तकें दान करने से उसका महत्व बढ़ जाता है। प्रभु स्मरण करने का फल दान देने वाले को भी मिलता है।
- पं. दामोदर प्रसाद शर्मा, ज्योतिषाचार्य