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मछली पालन के लिए जारी की गई निविदा प्रक्रिया का बहिष्कार

राजस्थान मत्स्य पालक विकास संगठन ने किया प्रदर्शन10 से 15 करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Jun 11, 2020

मछली पालन के लिए जारी की गई निविदा प्रक्रिया का बहिष्कार

मछली पालन के लिए जारी की गई निविदा प्रक्रिया का बहिष्कार

प्रदेश के मत्स्य विभाग की ओर जारी की गई निविदाओं का राजस्थान मत्स्य पालक विकास संगठन ने बहिष्कार किया है। जिससे सरकार को तकरीबन १० से १५ करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका है। गौरतलब है कि मत्स्य विभाग की ओर से प्रदेश के विभिन्न बांधों पर मछली पालन के लिए निविदा जारी की गई थी लेकिन संगठन ने इस प्रक्रिया का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि हमने सरकार से मांग की थी कि कोविड १९ को लेकर निविदा प्रक्रिया की बकाया राशि जमा करने के लिए दो माह का समय दिया जाए, विभाग ने भी इस संबंध में आश्वासन दिया लेकिन मत्स्य पालकों को सिर्फ १३ दिन का समय देकर राशि २४ फीसदी ब्याज के साथ जमा करवाने के आदेश भी जारी कर दिए। साथ ही यह भी कहा कि यदि राशि जमा नहीं की जाती तो टेंडर फिर से भरवाए जाएंगे। वह भी उन परिस्थितियों में जबकि मत्स्य पालकों ने कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन में विपरित
परिस्थितियों में निविदा भरने में रुचि दिखाई थी लेकिन सरकार की हठधर्मिता के कारण उनके पास इसका बहिष्कार करने के अतिरिक्त कोई और रास्ता नहीं रह गया है।
कई संगठनों का मिला समर्थन
राजस्थान मत्स्य पालक विकास संगठन ने इन निविदाओं का बहिष्कार किया है। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष देवेंद्र सिंह और सचिव भंवर सिंह शेखावत ने कहा मत्स्य विभाग प्रदेश में काफी बांधों का ठेका करता है। कम बारिश हो या फिर सूखा या बाढ़, इन सभी परिस्थितियों में भी मत्स्य पालक जोखिम उठाकर अपना काम करता है लेकिन सरकार उनकी ही अनदेखी कर रही है। एेसे में उनके सामने निविदाओं का बहिष्कार करने के सिवाय कोई रास्ता नहीं है। गौरतलब है कि प्रदेश के ट्रांसपोटर्स, बर्फ फैक्ट्री, मछली पकडऩे वाली लेबर पार्टी के साथ मंडीदार जो कि मछली की आड़त का कार्य करते हैं सभी ने मत्स्य टेंडर्स का बहिष्कार करते हुए राजस्थान मत्स्य पालक विकास संगठन को अपना समर्थन दिया।
कोरोना में डूब गई कमाई
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष देवेंद्र सिंह शेखावत एवं सचिव भंवर सिंह ने यह भी कहा कि कोविड. 19 के कारण सभी उद्योग धंधे ठप हो गए हैं। इसी के चलते मत्स्य पालन भी ठप हो गया है। बड़ी संख्या में मछलियां मर गई, लोगों के सामने रोज.रोजी का संकट हो गया, जिससे मत्स्य पालक परेशान हैं। एेसे में सरकार को मत्स्य पालकों को आर्थिक मदद देनी चाहिए जिससे उनका रोजी रोटी का संकट दूर हो सके।