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हार्मोन बनाने वाली ग्रंथि के इलाज से ठीक हो सकती बीपी की समस्या

जयपुर। देश में 22 करोड़ लोगों हाइपरटेंशन की समस्या है। इनमें से 10 प्रतिशत लोग सिर्फ अपने शरीर में चल रही हार्मोन की गड़बड़ी को ठीक कर बीपी की समस्या से हमेशा के लिए निजात पा सकते हैं।

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हार्मोन बनाने वाली ग्रंथि के इलाज से ठीक हो सकती बीपी की समस्या

जयपुर। देश में 22 करोड़ लोगों हाइपरटेंशन की समस्या है। इनमें से 10 प्रतिशत लोग सिर्फ अपने शरीर में चल रही हार्मोन की गड़बड़ी को ठीक कर बीपी की समस्या से हमेशा के लिए निजात पा सकते हैं। इन मरीजों को एंडोक्राइन हाइपरटेंशन की समस्या होती है जिसमें सामान्य बीपी की दवा काम नहीं करती। एंडोक्राइन सोसायटी ऑफ इंडिया राजस्थान चैप्टर की दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस 'राज ईएसआईकॉन 2023' रविवार को संपन्न हुई जिसमें विशेषज्ञों ने यह चौंकाने वाली जानकारी दी।

कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ. पी.पी. पाटीदार ने बताया कि दो दिनों में देश के सीनियर एंडोक्राइन एक्सपर्ट्स ने डायबिटीज और हार्मोनल डिजीज से संबंधित अपनी रिसर्च प्रस्तुत की। एंडोक्राइन सोसायटी ऑफ इंडिया के राजस्थान चैप्टर की पहली कॉन्फ्रेंस में 100 से अधिक रिसर्च पेपर और ओरल प्रजेंटेशन दिए गए। इस दौरान एक क्विज भी आयोजित की गई जिसमें स्टूडेंट्स से एंडोक्रिनोलॉजी से जुड़े सवाल पूछे गए। ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. संदीप माथुर ने बताया कि अंतिम दिन बच्चों में मोटापे की समस्या, गायनिकोमेस्टिया, रिवर्स डायबिटीज, थायरॉयड आई डिजीज, हाइपोकैल्सीमिया जैसे विषयों पर सत्र आयोजित हुए।

अलग-अलग ग्रंथि की समस्या से बनने वाले हार्मोन भी बीपी के जिम्मेदार –
डॉ. राजीव कासलीवाल ने बताया कि शरीर की एड्रीनल ग्रंथि से बनने वाले एल्डोस्टेरोन, कोर्टिसोल या एड्रेनालाईन के समान हार्मोन, थायराइड ग्रंथि के कम या अधिक सक्रिय होने से, पिट्यूटरी ग्रंथि की समस्या और पैराथायराइड ग्रंथियों द्वारा अधिक पैराथायराइड हार्मोन बनाने से हाई बीपी की समस्या हो सकती है। अगर इन ग्रंथियों की समस्या का इलाज करवाया जाए तो हाइपरटेंशन जड़ से ठीक हो सकता है।

मिठाई में सिर्फ 5 प्रतिशत मिठास भी कम करें तो उसके दूरगामी फायदे –
डॉ. पीपी पाटीदार ने बताया कि हर खुशी के मौके पर सभी भारतीय घरों में मिठाई का इस्तेमाल होता है। एक रिसर्च में सामने आया है कि अगर हम इन मिठाइयों की पांच प्रतिशत मिठास भी कम करें तो भविष्य में उसके काफी बेहतर परिणाम मिलेंगे। कम मिठास से लोगों के वजन और बीएमआई में कमी होगी जिससे डायबिटीज का खतरा कम होगा।