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गलता तीर्थ में अनुठा आयोजन, उत्तर भारत में भी साकार हो रही दक्षिण भारतीय संस्कृति

Galta Tirth Jaipur: उत्तर भारत की प्रमुख श्रीवैष्णव पीठ गलताजी में दक्षिण भारतीय संस्कृति साकार हो रही है। कोविड के दो साल बाद गलता तीर्थ में फिर से बड़ा आयोजन शुरू हुआ।

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गलता तीर्थ में अनुठा आयोजन, उत्तर भारत में भी साकार हो रही दक्षिण भारतीय संस्कृति

गलता तीर्थ में अनुठा आयोजन, उत्तर भारत में भी साकार हो रही दक्षिण भारतीय संस्कृति

Galta Tirth Jaipur: जयपुर। उत्तर भारत की प्रमुख श्रीवैष्णव पीठ गलताजी में दक्षिण भारतीय संस्कृति साकार हो रही है। कोविड के दो साल बाद गलता तीर्थ में फिर से बड़ा आयोजन शुरू हुआ। गलतापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशाचार्य के सान्निध्य में भगवान श्रीनिवास (वेंकटेश) का 7 दिवसीय ब्रह्मोत्सव आज से शुरू हुआ। ब्रह्मोत्सव में 7 नवम्बर तक महानुष्ठान होगा, जिसमें दक्षिण भारत के विद्वानों की ओर से नित्य अर्चन, पाठ, हवन सहित विभिन्न उत्सव आदि किए जाएंगे। इस आयोजन में सैकड़ों भक्त शामिल होंगे।

युवराज स्वामी राघवेन्द्र ने बताया कि भगवान श्रीनिवास, श्रीदेवी व भूदेवी का ब्रह्मोत्सव मनाया जा रहा है। इसमें भगवान के विभिन्न दिव्य व भव्य उत्सव का आयोजन हो रहा है। सात दिवसीय इस आयोजन में दक्षिण भारतीय संस्कृति साकार हो रही है। इसमें दक्षिण भारत से विद्वान पधार रहे है, जो वैदिक विधी से पूजा-पाठ, हवन, अनुष्ठान आदि सम्पन्न कराएंगे। इसके अलावा दक्षिण भारतीय पाक-शास्त्री भगवान को लगने वाले गोष्ठी व अन्य भोग प्रसादी आदि बनायेंगे। दक्षिण भारत से ही भगवान की माला आदि नित्य मंगाए जायेंगे। दक्षिण भारतीय वाद्यम से सम्पूर्ण श्री गलता तीर्थ गुंजायमान रहेगा। भगवान को दक्षिण भारत में विशेष रूप से तैयार किये गये आभूषण, वस्त्र आदि धारण कराये जायेंगे एवं दक्षिण भारतीय पात्रों से भगवान का पूजन, अभिषेक आदि किए जाएंगे।

ठाकुरजी को धारण कराएंगे रत्न जडित मुथांगी
दक्षिण भारत में भगवान की रत्न जडित विशेष अति आकर्षक मुथांगी पोषाक तैयार करायी जा रही है, जो कि ब्रह्मोत्सव में भगवान श्रीनिवास, श्रीदेवी व भूदेवी धारण करेंगे। इस आयोजन में देशभर से श्रद्धालुजन दर्शनार्थ आएंगे।

होंगे कई उत्सव
कलश यात्रा से कार्यक्रम का शुभारम्भ हो रहा है। स्वामी राघवेन्द्र ने बताया कि इस महोत्सव में अंकुरारोपण, ध्वजारोपण, वास्तुहोम, नित्य हवन्, दिव्य प्रबन्ध-पाठ, शान्ति-पाठ, वैदिक मन्त्रौच्चारण सहित भगवान् के तिरूमंजन अभिषेक, तीर्थ-भ्रमण, पुष्करणी पूजन, माला-पलटन, कल्याणोत्सव, डोला-उत्सव, पुष्पयाग, सहस्रार्चन, अवाबृथा स्नान आदि उत्सव होंगे।

कई किलों सामग्री उपयोग में ली जाएगी
7 दिवसीय महोत्सव में नित्य के भोग, तिरूमंजन, हवन, गोष्ठी आदि के लिए कई किलो फल, सब्जियां, दूध, दही, घी, अन्न, मेवे, तिल, फूल, माला, पुष्प आदि उपयोग में लिए जाएंगे।

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पहले दिन ये कार्यक्रम
महोत्सव के पहले दिन भगवान के अभिषेक पूजन के बाद सामूहिक स्त्रोत, विष्णु सहस्त्रनाम पाठ, विश्वकसेन निमंत्रण, पुण्याहवाचन, रक्षाबंधन के आयोजन हुए। इस मौके पर अंकुरारोपण व मंडल प्रवेश का आयोजन किया गया। इससे पहले कलश यात्रा निकाली गई।