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Phool Makhana: फूल मखाना के टूटे दाम, उत्पादन की तुलना में मांग कमजोर

पैदावार की तुलना में मांग कमजोर रहने से फूल मखाना एक बार फिर सस्ता हो गया है। किराना एवं मेवा बाजार में राजभोग फूल मखाने के भाव 350 रुपए प्रति किलो तक आ गए है। असम, भूटान एवं बंगाल के साथ—साथ उत्तर बिहार में तराई वाले क्षेत्रों में इस बार मखाने का उत्पादन चौतरफा अधिक रहा है।

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Phool Makhana: फूल मखाना के टूटे दाम, उत्पादन की तुलना में मांग कमजोर

Phool Makhana: फूल मखाना के टूटे दाम, उत्पादन की तुलना में मांग कमजोर

पैदावार की तुलना में मांग कमजोर रहने से फूल मखाना एक बार फिर सस्ता हो गया है। किराना एवं मेवा बाजार में राजभोग फूल मखाने के भाव 350 रुपए प्रति किलो तक आ गए है। असम, भूटान एवं बंगाल के साथ—साथ उत्तर बिहार में तराई वाले क्षेत्रों में इस बार मखाने का उत्पादन चौतरफा अधिक रहा है। कारोबारी हंसराज अग्रवाल का कहना है कि उत्पादन के अनुरूप घरेलू और निर्यात मांग नहीं है, इसी कारण फूल मखाना के दाम निरंतर घट रहे है। गुलाबबाग एवं दरभंगा मंडी में एवरेज फूल मखाना 250 से 270 रुपए प्रति किलो के आसपास बिक रहा है। इस बीच नवरात्रि एवं दशहरा की बिक्री पूरी हो गई है। स्नेक्स बनाने वाली कंपनियां भी इस बार माल कम खरीद रही है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों का समर्थन नहीं मिल रहा है। अब तक बाजार में जो माल आ गया है, वह स्टॉक हो चुका है। दो माह तक खपत का कोई सीजन दिखाई नहीं दे रहा है।

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कीमतों में और मंदी के आसार
कारोबारियों के अनुसार, फूल मखाने की कीमतों में और मंदी के आसार बन सकते हैं। त्योहारी खपत वाला सीजन समाप्ति की ओर है। देखा जाए, तो बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है। देश की खपत वाली बड़ी मंडियों में ग्राहकी को समर्थन नहीं मिल रहा है, जिससे कारोबारी हर भाव में माल की बिक्री कर रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले छह से आठ माह के दौरान फूल मखाने के भाव चौतरफा बिकवाली के चलते न्यूनतम स्तर पर आ गए थे। गुलाब बाग, दरभंगा, हरदा, फोरबिसगंज एवं पूर्णिया आदि मंडियों में कारोबारी माल बेचने से पीछे हट गए थे, क्योंकि मखाने की निकासी में पड़ता नहीं लग रहा था। फसल के प्रेशर में विलंब, स्टॉकिस्टों की लिवाली तथा पाइपलाइन खाली होने से फूल मखाने में तेजी के आसार बन गए थे। पिछले करीब एक साल पहले भी मखाने के भाव काफी नीचे स्तर पर आ गए थे।


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