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बीटीपी- रालोपा ने बढ़ाई कांग्रेस- भाजपा की टेंशन, उपचुनाव में दिखाया दमखम

-वल्लभनगर में दूसरे नंबर पर रही रालोपा तो धरियावद में बीटीपी समर्थित निर्दलीय दूसरे नंबर पर, सुजानगढ़ उपचुनाव में भी दूसरे नंबर पर रही थी रालोपा,2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा कांग्रेस को मिलेगी रालोपा, बीटीपी और थर्ड फ्रंट से टक्कर, जाट बाहुल्य सीटों पर रालोपा की नजर

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bjp congress

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जयपुर। प्रदेश में लंबे समय तक भाजपा और कांग्रेस के बीच विधानसभा चुनाव में सीधा मुकाबला होता आया है लेकिन अब धीरे-धीरे यह ट्रेंड भी बदलता दिखाई दे रहा है। 2018 में विधानसभा चुनाव में जहां पहली बार विधानसभा चुनाव में उतरी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) और भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) ने बेहतर परफॉर्मेंस किया था तो वहीं अब विधानसभा उपचुनाव में भी क्षेत्रीय दल अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रदेश में बीटीपी- रालोपा और थर्ड फ्रंट के बढ़ते जनाधार ने सत्तारूढ़ कांग्रेस और और प्रमुख विपक्षी दल भाजपा की टेंशन बढ़ा दी है, जिससे माना जा रहा है कि 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा-कांग्रेस को रालोपा-बीटीपी और थर्ड फ्रेंड से जूझना पड़ेगा।

उपचुनावों में रालोपा का बेहतर परफॉर्मेंस
वहीं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) की प्रदेश में 2018 के बाद से लेकर अब तक हुए उपचुनाव में बेहतर परफॉर्मेंस हुई है। रालोपा प्रमुख हनुमान बेनीवाल के नागौर से सांसद बनने के बाद रिक्त हुई खींवसर विधानसभा उपचुनाव में भी रालोपा ने कांग्रेस को पटखनी देते हुए अपनी सीट बरकरार रखी तो वहीं सुजानगढ़ उपचुनाव में भी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा और अभी हाल ही में वल्लभनगर में हुए उपचुनाव में भी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का प्रत्याशी उदय लाल डांगी दूसरे नंबर पर रहा है, जबकि भाजपा का प्रत्याशी चौथे नंबर पर रहा। इसी तरीके से भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी थावरचंद दूसरे नंबर पर रहे हैं। ऐसे में रालोपा-बीटीपी और थर्डफ्रंट के बढ़ते प्रभाव से कांग्रेस-भाजपा बेहद चिंतित हैं।

आदिवासी क्षेत्र में बीटीपी ने पैर पसारे
इधर 2018 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी क्षेत्र में 2 सीटें जीतकर अस्तित्व में आई बीटीपी अब लगातार आदिवासी क्षेत्र डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ में अपना जनाधार बढ़ाने में लगी हुई है, जबकि डूंगरपुर- बांसवाड़ा में अधिकांश कांग्रेस का वोट बैंक माना जाता है लेकिन जिस तरह से बीटीपी वहां परफॉर्मेंस कर रही है इस लिहाज से माना जा रहा है कि बीजेपी ने कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा दी है।


जाट बाहुल्य सीटों पर रालोपा की नजर
वहीं प्रदेश में जाट बाहुल्य विधानसभा क्षेत्रों में रालोपा प्रमुख हनुमान बेनीवाल की नजर है। रालोपा इन क्षेत्रों में लगातार अपना जनाधार बढ़ाने में भी लगी हुई है जिससे कहीं न कहीं कांग्रेस और भाजपा के वोट बैंक के खिसकने का डर बना हुआ है।

बसपा ने भी जमाया था 6 सीटों पर कब्जा
2018 में विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी 6 सीटों पर कब्जा जमाया था और कई सीटों पर उसके प्रत्याशी दूसरे नंबर पर आए थे। हालांकि बाद में बसपा के टिकट पर जीते 6 विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे जिसका मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

प्रदेश में ये क्षेत्रीय दल सक्रिय
प्रदेश में जो क्षेत्रीय दल सक्रिय हैं उनमें बसपा, माकपा, रालोपा, बीटीपी, एनसीपी, लोकदल, आम आदमी पार्टी, राकांपा और जेडीयू जैसे क्षेत्रीय दल सक्रिय हैं।