रेरा कानून के बावजूद परेशान करने वाले हालात
जयपुर। समय पर आशियाना चाहने वालों की सहुलियत के लिए सरकार ने रियल एस्टेट रेग्यूलेटर अथॉरिटी (रेरा) काननू लागू तो कर दिया, लेकिन अब भी कई लोग बिल्डर-विकासकर्ताओं की मनमानी के शिकार हैं। प्रदेश में 2027 प्रोजेक्ट रेरा में रजिस्टर्ड हैं और गंभीर यह है कि इसमें से करीब 30 प्रतिशत प्रोजेक्ट या तो लेप्स हो गए या फिर उन्हें निलंबित या निरस्त कर दिया गया है। इनमें से 555 प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा होने की मियाद निकल चुकी है, लेकिन बिल्डर ने न तो एक्सटेंशन लिया और न ही प्रभावित आवंटियों को पैसा लौटाया। ऐसे सभी प्रोजेक्ट्स में 28 हजार से ज्यादा बुकिंगकर्ता शामिल हैं, जिनकी नींद उड़ी हुई है। बुकिंगकर्ताओं को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।
यह है परेशान करने वाली स्थिति
-45 प्रोजेक्ट निरस्त किए गए
-2 प्रोजेक्ट में फ्लैट बेचान पर रोक लगा दी गई
-555 प्रोजेक्ट लेप्स की सूची में डाल दिए
-2 प्रोजेक्ट का कब्जा लिया रेरा ने
-3 प्रोजेक्ट में से 12 फ्लैट को अटैच किया गया
आखिर अपना घर चाहने वालों का क्या दोष?
लोगों ने अपने घर के लिए बुकिंग कराई। बिल्डर ने उन्हें आवास का कब्जा देने की संभावित तारीख भी बता दी। लेकिन कई प्रोजेक्ट में 2 से 3 साल बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। जबकि, ज्यादातर बुकिंगकर्ताओं ने पूरी राशि जमा भी करा दी। इसके बाद भी उन्हें घर के लिए रेरा से लेकर कोर्ट तक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे मामलों में जयपुर समेत प्रदेश के दूसरे शहरों के नामी बिल्डर भी शामिल हैं।
300 से ज्यादा प्रोजेक्ट, बिल्डरों को नोटिस
अथॉरिटी ने लेप्स हुए 300 से ज्यादा प्रोजेक्ट से जुड़े बिल्डरों को नोटिस जारी कर तलब किया है। इनमें ज्यादातर ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिन्होंने प्रोजक्ट समय पर पूरा नहीं किया और न ही एक्सटेंशन लिया। एक्सटेंशन के लिए शुल्क दर 7.50 रुपए से 75 रुपए प्रति वर्गमीटर है।
इन्हें किया टेकओवर और अटैच, फिर भी चेत क्यों नहीं रहे
1. टेकओवर
-भिवाड़ी स्थित अरावली गार्डन आवासीय योजना को टेकओवर किया। इस प्रोजेक्ट में 907 फ्लेट बनने थे। यहां 17484.21 वर्ग मीटर जमीन और उस पर बने स्ट्रक्चर को नीलाम कर रहे। नीलामी राशि से ही आवंटियों को रोकड़ दी जाएगी। 27 नवंबर, 2013 को प्रोजेक्ट का काम शुरू हुआ। इसे 25 अक्टूबर 2020 तक पूरा करना था।
-जयपुर शहर के सी-स्कीम स्थित दस मंजिला आवासीय इमारत (सनराइजर्स) का कब्जा लिया। इमारत में 38 फ्लैट हैं। इसका निर्माण पूरा कराकर आवंटियों को कब्जा सौंपा जाएगा। यह प्रोजेक्ट एसएनजी रियलिटी ग्रुप का है। प्रोजेक्ट 16 नवम्बर 2014 को शुरू हुआ और निर्माण कार्य 15 मई 2021 तक पूरा करना था। लेकिन अब भी 40 फीसदी काम बाकी है।
2. फ्लैट अटैच
-कोटा में श्रीनाथ ओएसिस प्रोजेक्ट में 5 फ्लैट का कब्जा लिया
-भीलवाड़ा में शांति टॉवर प्रोजेक्ट में 2 फ्लैट
-जयपुर के जमना डेयरी इलाके में एक प्रोजेक्ट में 5 फ्लैट शामिल
(इन सभी प्रोजेक्ट्स में आवास बुकिंग कराने वाले लोग भटक रहे हैं। न तो उन्हें तो आशियाना मिला और न ही वापिस पैसा)