तकनीक का बदलाव स्वरूप : शहरों में तेजी से बढ़ रहा स्टील स्ट्रक्चर निर्माण का कंसेप्ट
जयपुर. जयपुर समेत बड़े शहरों में ऊंची इमारतें भी अब स्टील स्ट्रक्चर पर खड़ी हो रही हैं। राज्य की सबसे ऊंची इमारत आइपीडी टावर से लेकर मल्टीप्लेक्स तक हाइब्रिड मॉडल (स्टील ज्यादा, कंक्रीट कम) पर बन रही हैं। तकनीक पुरानी है, लेकिन स्वरूप बदला है, इसी कारण कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ कुछ आवासीय भवनों में भी स्टील स्ट्रक्चर से काम शुरू किया जा रहा है।
कम समय में मजबूत निर्माण, कंक्रीट की तुलना में 50 प्रतिशत तक कम वजनी होने के कारण लोग अब इस निर्माण तकनीक की तरफ बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले तीन साल पहले तक सालाना औसत वृदि्ध 8-9 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 30 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसका दायरा जयपुर, उदयपुर, भिवाड़ी, कोटा, अजमेर सहित बड़े शहरों में फैल रहा है।
आइपीडी टावर - 65 प्रतिशत हिस्सा स्टील, वजन 6200 टन
प्रदेश की सबसे ऊंचे आइपीडी टावर का मुख्य हिस्सा स्टील स्ट्रक्चर ही होगा। इसमें करीब 6200 टन स्टील उपयोग होगा, जो निर्माण सामग्री का 65 प्रतिशत हिस्सा है। जेडीए ने पिलर, बीम, गर्डर स्ट्रक्चर निर्माण का जिम्मा दो बड़ी स्टील कंपनियों को सौंपा है। स्ट्रक्चर फरीदाबाद में तैयार हो रहा है, यहां केवल नट-बोल्ट से कसने का काम ही करना पड़ रहा है। कंक्रीट की तुलना में प्रोजेक्ट निर्माण 60 फीसदी समय में ही होने का दावा किया गया है।
इन शहरों में स्टील स्ट्रक्चर के बड़े प्रोजेक्ट
-एसएमएस अस्पताल परिसर में आइपीडी टावर, सरदार पटेल मार्ग पर आठ मंजिला बिल्डिंग, आमेर रोड पर सिनेप्लेक्स, जगतपुरा में सिनेप्लेक्स, वैशाली नगर में व्यावसायिक इमारत
-कोटा में तीन व्यवसायिक इमारत, एक कोचिंग सेंटर भवन
-अजमेर और उदयपुर में एक प्रमुख वाहन कंपनी का आउटलेट
-भिवाड़ी में बड़ी औद्योगिक इमारत, जापानी कंपनियों के जोन में ज्यादातर निर्माणाधीन भवन
कंक्रीट व स्टील स्ट्रक्चर में अंतर
आइटम————आरसीसी स्ट्रक्चर———स्टील स्ट्रक्चर
1. क्रॉस सेक्शन———बड़ा क्रॉस सेक्शन———छोटा क्रॉस-सेक्शन
2. स्थायित्व———सामान्य मौसम से कम प्रभावित —जंग लगने की स्थिति
3. भूकंप प्रभाव——कम प्रतिरोधी———ज्यादा भूकंपरोधी
4. आग प्रतिरोध——अग्नि प्रतिरोध अधिक——अग्नि प्रतिरोध कम
5. नींव———मजबूत नींव की जरूरत———भारी नींव की आवश्यकता नहीं
6. निर्माण समय———सामान्य———तुलनात्मक 40 फीसदी कम समय
7. निर्माण लागत———सामान्य लागत———25 प्रतिशत महंगा
8. लेबर——— अर्द्धकुशल लेबर से काम संभव——तकनीक कुशल लेबर आवश्यक
9. निर्माण साइट पर मेन पावर——पूरी आवयश्कता——ज्यादातर कंपोनेंट फैक्ट्री में तैयार
10. लाइफ——सामान्यत: 100 साल के आधार पर——200 साल तक
सरकार : पुनर्वास के लिए अफोर्डेबल आवास पर फोकस
गरीब-जरूरतमंदों के पुनर्वास के लिए सरकार अब स्टील स्ट्रक्चर युक्त छोटे आवास बनाने पर मंथन कर रही है। नगरीय निकायों को इसके लिए होमवर्क करने के लिए कहा गया है।
- दिल्ली, मुंबई जैसी मेट्रो सिटी की तर्ज पर ही राजस्थान के बड़े शहरों में स्टील स्ट्रक्चर कंसेप्ट पर निर्माण तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी इमारतों में तो इसका दायरा 30 प्रतिशत तक बढ़ा है। लागत जरूर ज्यादा है, लेकिन बाकी मामलों में फायदा है। देशभर में इस तकनीक पर कॉन्फ्रेंस और प्रशिक्षण कार्यशाला हो रही है।
-तुषार सोगानी, चेयरमैन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट (राजस्थान चेप्टर)