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उत्तराखंड में आस्था और कुदरत की छटा के बीच मां भगवती कालिंगा मेले के लिए जयपुर से जाएंगी बसें

आस्था और कुदरत की छटा बिखेरता हुआ यह देवस्थान स्वर्ग सा दिखाई पड़ता है। बताया जाता है कि 17वीं शताब्दी के मध्य बडियारी कुल के प्रथम व्यक्ति ललित बडियारी द्वारा इस दुशान क्षेत्र में मां भगवती कालिंका के मंदिर की स्थापना की गई थी। पौराणिक काल से चली आ रही परंपराओं के मुताबिक बडियारी वंश के लोग हर तीन साल में मां भगवती है।

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उत्तराखंड में आस्था और कुदरत की छटा के बीच मां भगवती कालिंगा मेले के लिए जयपुर से जाएंगी बसें

उत्तराखंड में आस्था और कुदरत की छटा के बीच मां भगवती कालिंगा मेले के लिए जयपुर से जाएंगी बसें

जयपुर। उत्तराखंड में सर्दियां में कई मेले भरे जाते हैं। इन्हीं दिनों गढ़वाल और कुमाऊं की आराध्य देवी मां भगवती कालिंका (adorable goddess mother bhagwati kalinka Fair) का मेला भरा जाता है। मेला 8 दिसंबर से शुरू हो गया और 27 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान भक्त मां कालिंका की जात्रा और पूजा का आयोजन करते हैं। उत्तराखंड के मध्य सीमावर्ती दुसान क्षेत्र में विराजमान मां भगवती काली को समर्पित सिद्धपीठ कालिंका धाम पौराणिक काल से ही गढ़वाल और कुमाऊं के आम जनमानस का श्रद्धा, भक्ति, और आस्था का केंद्र रहा है। सभी भक्तजनों की मनोकामना पूर्ण करने वाला यह देवस्थान बडियारी वंशज की कुलदेवी (Kuldevi of Devasthan Badiyari Descendants) के रूप में जाना जाता है।

जयपुर से 24 से 27 तक चलेंगी बसें

गढ़वाल सभा जयपुर के महासचिव प्रेम सिंह रावत ने बताया कि जयपुर से उत्तराखंड के रामनगर के लिए राजस्थान रोडवेज की बसें 24 दिसंबर से 27 दिसंबर तक चलेंगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान रोडवेज के प्रबन्ध निर्देशक से गढ़वाल सभा जयपुर की ओर से यात्रियों को होने वाली परेशानी को देखते हुए जयपुर से रामनगर एक अतिरिक्त बस चलाने के लिए निवेदन किया था। राजस्थान रोडवेज ने अतिरिक्त बस की स्वीकृति के लिए उत्तराखंड रोडवेज को पत्र लिखा था, जिसकी स्वीकृति उनके द्वारा जारी की गई है।

कुदरती छटा के बीच...

आस्था और कुदरत की छटा बिखेरता हुआ यह देवस्थान स्वर्ग सा दिखाई पड़ता है। बताया जाता है कि 17वीं शताब्दी के मध्य बडियारी कुल के प्रथम व्यक्ति ललित बडियारी द्वारा इस दुशान क्षेत्र में मां भगवती कालिंका के मंदिर की स्थापना की गई थी। पौराणिक काल से चली आ रही परंपराओं के मुताबिक बडियारी वंश के लोग हर तीन साल में मां भगवती है। मंदिर समिति एवं मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी अजित रावत ने बताया कि हजारों भक्तों के बीच 8 दिसंबर को मां भगवती के दिव्य स्वरूप निशान का कुल पुरोहितों द्वारा विधि पूर्वक अनावरण किया जाएगा।

निशान निकलेंगे भ्रमण पर

निशान के अनावरण के बाद इन्हें पूरे क्षेत्र में भ्रमण करवाया जाता है। भक्तजन आशीर्वाद स्वरुप इसके दर्शन करते हैं। इन निशान को भगवती के दिव्य स्वरूप का प्रतीक माना जाता है जोकि साक्षात देवी के स्वरूप में गांव-गांव जाकर अपनी दिशा ध्याणियों और भक्तजनों को सुख समृद्धि एवं खुशहाल जीवन का आशीर्वाद देते हुए भ्रमण करते हैं।

19 दिन की जात्रा

19 दिनों की जात्रा के के बाद 26 दिसंबर को मां भगवती अपने भीतरी स्थान कोठा में प्रवेश करेंगी। इस स्थान पर पूरी रात पूजा पाठ, देव नृत्य एवं देव अवतरण का कार्यक्रम चलेगा। अगले दिन सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ ही मां भगवती अपने मुख्य स्थान मंदिर को प्रस्थान करेंगी। यहां पर श्रद्धालु दर्शनों को कतारें लगाए खड़े रहेंगे। देशभर में रह रहे श्रद्धालु इस दिन मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।