
नए कार्य शुरू होने की संभावना के चलते सीमेंट कंपनियों ने बढ़ा दिए भाव, दो बार बढ़ गईं कीमतें
सीमेंट उत्पादक कम्पनियों की भी यही मांग है कि सरकार को प्रदेश की माली हालात और अर्थव्यवस्था के संतुलन के लिए एहतियाती उपायों के साथ सीमेंट उद्योग को फिर से शुरू करना चाहिए। प्रदेश में हर साल सीमेंट की कुल बाजार मांग औसतन करीब 21 मिलियन टन है। फरवरी तक यह 19.91 मि.टन पहुंच गई थी। बाजार को देखते हुए उत्पादक बीते वित्तीय वर्ष में 21.75 मिलियन टन तक पहुंचने की आशा जता रहे थे।
अगली तिमाही रहेगी कमजोर
सीमेंट उत्पादन के जानकारों का मानना है कि इस उद्योग में बारिश का सीजन यानी दूसरी तिमाही बिक्री के लिहाज से कमजोर रहती है। ऐसे में वित्तीय वर्ष के अगले छह महीनों में अप्रेल से लेकर जून तक के तीन महीने ही सबसे महत्वपूर्ण है। इन छह महीनों में प्रदेश में औसतन 9 मिलियन टन की मांग मानें तो करीब 5.50 मिलियन टन बिक्री शुरुआती तीन महीनों में होती है। मौजूदा हालात और लॉकडाउन पर बने संशय के चलते अब इसी तिमाही पर संकट आ गया है।
इस सेक्टर को जल्द शुरू करना चाहिए
लॉकडाउन बढऩे से प्रदेश में 2020—21 की महत्वपूर्ण पहली तिमाही में भी सीमेंट उद्योग का संकट और गहरा गया है। सरकार को जल्द ही गाइडलाइंस के साथ सीमेंट सेक्टर को फिर शुरू करने के उपाय करने चाहिए।
संजय मेहता, प्रेसिडेंट (कमर्शियल) श्री सीमेंट
इकाइयों से बातचीत हो रही है
लगातार सीमेंट उत्पादक इकाइयों से बातचीत हो रही है। अगले एक दो दिन में इन्हें शुरू करने के बारे में सरकार निर्णय कर सकती है।
डॉ.सुबोध अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग विभाग
Updated on:
15 Apr 2020 07:21 pm
Published on:
15 Apr 2020 06:50 pm
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