गेट की मरम्मत का जो काम पुरातत्व विभाग को कराना चाहिए था, वह काम पुरातत्व से अनजान जेएमआरसी ने अपने स्तर पर कराया। मरम्मत के बाद नगर निगम ने रिसर्जेंट राजस्थान के पहले गेट का रंग-रोगन कराया और सभी छोटी-बड़ी दरारों को भर दिया गया, लेकिन टनल खुदाई के दौरान हुए कंपन से गेट की पुरानी दरारें ज्यादा बढ़ गईं और फिर से नजर आने लगीं। अब पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी मान रहे हैं कि गेट के पुराने जोड़ बढ़ गए हैं।
जेएमआरसी के सीएमडी ने दावा किया था कि उच्च स्तरीय तकनीक का इस्तेमाल करके चांदपोल गेट को बिना नुकसान पहुंचाए नीचे से दूसरी टनल का निर्माण पूरा कर लिया है, लेकिन गेट के पुराने जोड़ हिलने से आई दरारों ने इस दावे की पोल खोल कर रख दी है। गेट के दक्षिणी हिस्से में ऊपर छतरी के पास जोड़ खुलने से आई दरार साफ नजर आ रही है। गेट के दूसरे हिस्से में भी एेसी ही दरार नीचे से ऊपर तक पहुंच रही है, जो इसके दक्षिणी हिस्से के लिए खतरे का सूचक है।
खुले हैं जोड़
पुरातत्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि विभाग 'ऊपरी' दबाव के चलते गेट में नुकसान होने की बात नहीं बोल रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि टनल खुदाई से गेट की पुरानी दरारें खुली हैं।
पुरानी हैं दरार
जेएमआरसी के परियोजना निदेशक अश्विनी सक्सेना का कहना है कि टनल का काम पूरा होने के बाद हमारे स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट और पुरातत्व विभाग के एईएन ने गेट का परीक्षण कर रिपोर्ट भी दी है कि गेट सुरक्षित है। जो दरारें नजर आ रही हैं, वे पुरानी दरारें हैं।