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जयपुर. अप्रेल का महीना आमतौर पर तेज गर्मी का माना जाता है, लेकिन इस बार बारिश ने गर्मी की एंट्री को कुछ समय के लिए रोक दिया है। इस कारण अभी तक पंखे-कूलरों ने रफ्तार नहीं पकड़ी है। लोग अभी तक गर्म पानी से नहा रहे हैं। जबकि होली के बाद से लोग ठंड़े पानी से ही नहाना शुरू कर देते हैं। फ्रिज-मटके का ठंड़ा पानी अभी तक लोगों ने पीना शुरू नहीं किया है।
ठंडा पड़ा कूलर का मार्केट, गर्मी का इंतजार
गर्मी के इंतजार में इस बार कूलर का मार्केट भी ठंडा है। कूलर के रिटेलर्स के मुताबिक हर साल सीजन का ४० प्रतिशत माल अप्रेल में ही बिकता है। बिक्री मार्च से ही शुरू हो जाती है। इस बार बिक्री न के बराबर हुई है।
40 डिग्री तक पहुंचेगा पारा
मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार बार-बार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के कारण शहर में बारिश का दौर चल रहा है। अभी 8-9 अप्रेल को भी एक और सिस्टम सक्रिय हो सकता है। इसके बाद 12-13 अप्रेल को पारा चढ़ेगा। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
कई स्थानों पर आज बारिश के आसार
जयपुर. प्रदेश में मौसम के तेवर लगातार बदल रहे हैं। पिछले दो दिन से मौसम शुष्क रहने से तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राज्य में शुक्रवार को अधिकतम तापमान ४० डिग्री सेल्सियस के पास पहुंच गया है। बांसवाड़ा में सर्वाधिक ३९.२ डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसके बाद फलौदी और बाड़मेर में अधिकतम तापमान ३७ डिग्री दर्ज किया गया। शनिवार को मौसम विभाग ने बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार 8-9 अप्रेल से एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। जिसके असर से पूर्वी राजस्थान के उदयपुर, अजमेर, कोटा, जयपुर व भरतपुर संभाग के जिलों में कुछ स्थानों पर मेघ गर्जन के साथ कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। वहीं, पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर व जोधपुर संभाग के ज्यादातर भागों में आगामी तीन-चार दिन मौसम शुष्क रहेगा।
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मार्च-अप्रेल में 2-3 सिस्टम बनते हैं, अब तक 7 पश्चिमी विक्षोभ आ चुके
मार्च-अप्रेल में सामान्यत: 2-3 सिस्टम बनते हैं। इस बार अब तक ७ पश्चिमी विक्षोभ आ चुके हैं। अभी जो सिस्टम बन रहे है, उसका कारण पश्चिमी जेटस्ट्रीम है। पश्चिमी जेटस्ट्रीम वायुमंडल में 10-12 किलोमीटर ऊंचाई पर बनते हैं। इस सीजन में सामान्य तौर पर ये हिमालय से नॉर्थ रीजन (जम्मू-कश्मीर) में बनते हैं। इस बार साउथ रीजन में आ गए हैं। इनका असर राजस्थान, गुजरात आदि पर ज्यादा दिखाई दे रहा है। शनिवार व रविवार को एक और सिस्टम बनेगा। जिसका असर दक्षिणी राजस्थान पर रह सकता है। पश्चिमी विक्षोभ का सबसे ज्यादा असर कृषि पर पड़ा है। इस सीजन में लगातार बारिश से रबी की फसलों को नुकसान हुआ है। यह समय गेहूं, सरसों, चना, जीरा आदि फसलों की हार्वे स्टिंग व थ्रेसिंग का है।
मार्च महीने के आखिरी दो हफ्ते शुष्क होने चाहिए जो थ्रेसिंग के लिए अच्छा होता है। बार-बार बारिश होने से तापमान नियंत्रण में रहा है। इससे कई सेक्टर को फायदा भी हुआ है। बिजली-पानी की डिमांड कम है।-राधेश्याम शर्मा, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर
मार्च महीने के आखिरी दो हफ्ते शुष्क होने चाहिए जो थ्रेसिंग के लिए अच्छा होता है। बार-बार बारिश होने से तापमान नियंत्रण में रहा है। इससे कई सेक्टर को फायदा भी हुआ है। बिजली-पानी की डिमांड कम है।-राधेश्याम शर्मा, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर
Published on:
08 Apr 2023 01:24 am
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