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विश्व बालश्रम निषेध दिवस: राजस्थान में भी बातें बड़ी-बड़ी, पर ‘धरातल’ पर सच्चाई चौंकाने वाली

विश्व बालश्रम निषेध दिवस: राजस्थान में भी बातें बड़ी-बड़ी, पर 'धरातल' पर सच्चाई चौंकाने वाली

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जयपुर

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Rajesh

Jun 12, 2018

जयपुर

मौसम बदलने के साथ सबकुछ बदल रहा है, हमारे और आपके बच्चे स्कूल जा रहे हैं, वे परीक्षाएं दे कर आगे की कक्षाओं में जाएंगे और कुछ बन जाएंगे,मगर दो जून की रोटी का जुगाड़ करने वाले बाल श्रमिकों की दिनचर्या नहीं बदल रही। उन्हें तो वही मुंह अंधेरे उठना और रोजी-रोटी के लिए निकलना है।

भारत सरकार की ओर से बनाए गए अधिनियम में बच्चों को शिक्षा का अधिकार अनिवार्य किया गया है। लेकिन प्रदेश में अनेक ऐसी बस्तियां है, जिनके बच्चे आज भी शिक्षा से वंचित है। शिक्षा विभाग के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चुरू जिले में 42 बच्चे एसे हैं जो स्कूलों से नहीं जुड़े हैं।

आंकडो के अनुसार भारत में 5 से 14 आयुवर्ग के करीब 1 करोड़ बाल मजदूर है। ऐसे में राजस्थान की बात की जाए तो यहां भी हालत खराब है। प्रदेश में करीब पंद्रह लाख बाल श्रमिक है। इनमें से करीब तीन लाख बच्चे पूर्णकालिक बाल श्रमिक है। एक आंकडे के मुताबिक प्रदेश पांच से चौदह वर्ष की आयु का हर दसवां बच्चा बाल श्रमिक है, तथा हर दस लडकियों मे से एक लड़की और हर बारह में से एक लड़का बाल श्रमिक है।


प्रदेश में 50.25 प्रतिशत बच्चे पांच से चौदह की आयु के बाल श्रमिक है। ये सभी कारखानों,बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, होटलों, ढाबों पर काम करने से लेकर कचरे बीनने बाले बाल श्रमिक है। राजधानी जयपुर में सबसे ज्यादा चूड़ी कारखानों में छोटे बच्चों को देखा जा सकता है। ऐसे में शहर के चौराहों गाड़ी साफ और भीख मांगते देखे जा सकते है।


प्रदेश के आदिवासी बहुल्य इलाको की बात कि जाए तो वहां से प्रतिवर्ष बच्चों व बच्चियों का बीटी कॉटन के लिए पलायन हो रहा है। मजदूरी के बहाने बालिकाओं का देहशोषण किया जाता है तो कहीं बचपन श्रम की भट्टी में तप रहा है। अब तो पाखंड के नाम पर बच्चों के साथ छलावा शुरू हो गया। शनि के नाम का कमंडल पकड़ाकर उन्हें लोगों से भीख मांगने के लिए भेजा जा रहा है। ऐसा कोई एक-दो साल या माह में नहीं हो रहा, बरसों से चल रहा है। इस दरम्यिान न जाने बच्चों के हितैशी कितने स्वयंसेवी संगठन खड़े हो गए। लम्बी-चौड़ी कार्यशालाएं हो गई।

क्या है बालश्रम
बाल श्रम भारतीय संविधान के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से कारखाने, दुकानों, रेस्टोरेंट, होटल, कोयला खदान, पटाखे के कारखाने आदि जगहों पर कार्य करवाना बाल श्रम है। बाल श्रम में बच्चों का शोषण भी शामिल होता है। शोषण से आशय बच्चों से ऐसे कार्य करवाना,जिनके लिए वे मानसिक एवं शारीरिक रूप से तैयार न हों।


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