
यूएन के मंच से दुनिया सुनेगी गणेशी के संघर्ष की कहानी
- उदयपुर के आदिवासी इलाके की एक नाबालिग ने तोड़ी बाल विवाह की बेडिय़ां
एलइडी बल्ब बना अपने ही नहीं, गांव की एक दर्जन और बालिकाओं की जिन्दगी कर रही है रोशन
जितेन्द्र पालीवाल
उदयपुर. बचपन में हाथ पीले होने के बाद उसने ससुराल में जलालत झेली। समझ विकसित हुई, तो उसने अपने फैसले खुद लेने की ठानी। पैसों के लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया। खुद ही नहीं, अपनी जैसी और भी देहाती किशोरियों को हुनरमंद बना स्वरोजगार से जोड़ा और अब वह जिन्दगी को जिन्दाबाद करती चली जा रही है। उदयपुर के आदिवासी इलाके की नाबालिग लड़की गणेशी मेघवाल की पथरीली राह पर चल सफल हुई संघर्ष की इस कहानी को अब संयुक्त राष्ट्र के मंच से पूरी दुनिया सुनेगी।
सायरा तहसील क्षेत्र के पिछड़े इलाके ओड़ों का गुड़ा (पानेर) की 17 वर्षीय गणेशी की शादी मां-बाप ने 15 साल की उम्र में पड़ोस के ही एक गांव में कर दी। बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई उसकी जिन्दगी को अंधेरे में धकेल देगी, यह उसने सोचा नहीं था। नाबालिग अवस्था में ससुराल गई, तो खुद से लगभग दोगुनी उम्र के पति का हिंसक बर्ताव देखकर उसे यह समझने में देर नहीं लगी कि अब आगे का जीवन उसके साथ कटना आसान न होगा। लिहाजा, उसने अपने जज़्बातों का कत्ल होते देखने की बजाय खुद का फैसला करने की ठान ली। बाल-विवाह की बदकिस्मती को उसने कुछ ही वक्त बाद ठुकरा दिया और पिता के घर चली आई।
तोड़ा पुरुषों का एकाधिकार
यहां रहकर एक एनजीओ के कौशल विकास कार्यक्रम से जुड़ गई। उसने ब्यूटी पार्लर और सिलाई जैसे परम्परागत कौशल को चुनने की बजाय आमतौर पर पुरुषों के एकाधिकार वाले इलेक्ट्रिशियन का काम सीखा। साथ ही उसने एलइडी बल्ब एसेम्बल करने का हुनर निखारकर जिन्दगी का अंधेरा दूर करने की ओर कदम बढ़ा दिए। न केवल गणेशी, बल्कि गांव की करीब एक दर्जन हमउम्र बालिकाओं को भी यह काम सिखाकर रोजगार से जोड़ा।
- हर माह कमा लेती है छह-सात हजार
जिस गांव में गरीब परिवारों के लोग मेहनत-मजदूरी करके बमुश्किल दो हजार रुपए मासिक कमा पाते हैं, वहां गणेशी एक मिसाल बनकर उभर रही है। वह इलेक्ट्रिशियन का कार्य तो करती ही है। साथ ही होल्डर, कैप, प्लेट, एलइडी, होसिंग और अन्य पाट्र्स की ऑनलाइन शॉपिंग करके बल्ब एसेम्बल करती है व घर-घर बेचने निकल पड़ती है। छह-सात हजार रुपए मासिक कमा लेती है। लोगों को घर का बिजली बिल कम करने के लिए एलइडी बल्ब इस्तेमाल के लिए प्रेरित करती है। हालांकि गणेशी बताती है कि बिक्री बढ़ाना आसान नहीं है। उसके साथ जुड़ीं और किशोरियां भी तीन से साढ़े तीन हजार रुपए का मुनाफा कमा रही हैं।
- शादी से पढ़ाई छूटी थी, फिर पढ़कर आगे बढ़ेगी
गणेशी ने आठवीं तक पढ़ाई की, जो शादी बाद छूट गई। दो साल बाद अब फिर से वह काम के साथ पढ़ाई भी शुरू करना चाहती है।
- अपने इलाके में यूथ आइकॉन
जतन संस्थान के निदेशक कैलाश बृजवासी बताते हैं कि आदिवासी क्षेत्र में यह किशोरी यूथ आइकॉन बनकर उभर रही है। वह दो साल से आंगनबाड़ी परियोजना से जुड़ी है। बस्तियों में जाकर महिलाओं, खासकर किशोरियों के मासिक धर्म, स्वच्छता और सेहत से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही है। शर्म और हिचकिचाहट के दायरे से बाहर नहीं आ पा रहीं बालिकाओं को वह प्रेरित करती है।
- 12-15 नवम्बर को नैरोबी में
नैरोबी में 12-14 नवम्बर तक होने वाले संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख संगठन यूएनएफपीए के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 'लाइफ स्कील एण्ड ट्रांसफोर्मिंग जेंडर एण्ड सोशल नॉम्सÓ सत्र में करीब 15 मिनट तक गणेशी अपनी सफलता की कहानी दुनियाभर से आए प्रतिनिधियों को सुनाएगी।
Updated on:
09 Nov 2019 02:32 am
Published on:
09 Nov 2019 02:31 am
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