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ल्हासा। अपनी विस्तारवादी नीतियों के तहत चीन अब भारत से लगती एलएसी के करीब तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में रेलवे लाइन बिछाने की योजना बना रहा है। ये रेलवे लाइन भारत के लिए कितनी चिंता की बात हो सकती इसका अंदाजा इससे लग सकता है कि अक्साई चिन से होकर गुजरने वाला शिंजियांग- तिब्बत राजमार्ग ही भारत और चीन के बीच तनाव भड़कने का कारण बना था और इसके बाद साल 1962 में इसको लेकर युद्ध हो गया था। तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) के विकास और सुधार आयोग ने अपनी वेबसाइट पर 14वीं पंचवर्षीय योजना में मध्यम और दीर्घकालीन रेलवे नेटवर्क विस्तार की योजना पेश की है। योजना में कहा गया है कि टीएआर रेल नेटवर्क में विस्तार करते इसको मौजूदा 1400 किमी से 2025 तक 4000 किमी तक और 2035 तक 5000 किमी तक पहुंचाया जाएगा। इसके अंदर उन नए मार्गों को बिछाने की योजना भी शामिल है जो चीन से लगती भारत और नेपाल की सीमा के करीब से गुजरेंगे।
पैंगोंग झील के पास से होकर गुजरेगी लाइन
दिए गए ब्योरे के अनुसार, चीन की ये प्रस्ताविक रेलवे लाइन तिब्बत में शिगात्से से शुरू होगी और उत्तर पश्चिम में नेपाल बॉर्डर से होकर जाएगी। दूसरी तरफ यह अक्साई चिन से होकर गुजरते हुए और शिंजियांग प्रांत के होटान में खत्म होगी। यह प्रस्तावित रेलवे लाइन अक्साई चिन के रुटोग और चीन के इलाके में पैंगोंग झील के पास से होकर गुजरेगी।
चीन तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में कई रेलवे बनाने की योजना बना रहा है, जिसमें शिंजियांग-तिब्बत रेलवे का शिगात्से-पखुक्त्सो खंड भी शामिल है, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब है और विवादित अक्साई चिन क्षेत्र के माध्यम से है।
तिब्बत में फिलहाल 3 रेल नेटवर्क
1. 2006 में शुरू होने वाली किन्हाई-तिब्बत लिंक
2. 2014 में लॉन्च होने वाली ल्हासा-शिगात्से रेलवे लाइन
3. 2021 में शुरू हुई ल्हासा-न्यिंगची लाइन
शिंजियांग-तिब्बत रेलवे है सबसे महत्वाकांक्षी
नई योजनाओं में सबसे महत्वाकांक्षी शिंजियांग-तिब्बत रेलवे है, जो मोटे तौर पर चीन की दक्षिण-पश्चिमी सीमा के साथ चलने वाले जी219 राष्ट्रीय राजमार्ग के मार्ग का अनुसरण करेगी। यही वो राजमार्ग है जिसके निर्माण ने 1962 में भारत और चीन के बीच तनाव और फिर युद्ध हुआ था। चीन इस राजमार्ग को आकाश में सड़क का नाम देता है।
बनेंगे 59 नए एयरपोर्ट और 300 हेलीपैड्स
तिब्बत स्वात्त क्षेत्र में चीन की बुनियादी ढांचे में विकास का रोड मैप बेहद महात्वाकांक्षी है। इसके अंतर्गत रेलवे लाइन के विस्तार के अलावा इस क्षेत्र में 59 नए एयरपोर्ट और 300 हेलीपैड्स के भी विस्तार की योजना है। स्पष्ट रूप से इनका विस्तार दोहरे उपयोग के लिए किया जा रहा है। इसके बन जाने से बीजिंग को तेजी से सुरक्षा बलों की तैनाती में आसानी होगी और तिब्बत को भी सांस्कृतिक रूप से चीन में शामिल करने में मदद मिलेगी।
36 घंटे की यात्रा 12 घंटे में होगी
योजना में कहा गया है कि 2025 तक कई रेलवे परियोजनाओं में अच्छी प्रगति हो चुकी होगी। इनमें वर्तमान में चल रहे सिचुआन-तिब्बत रेलवे के यान-न्यिंगची खंड का क्रियान्वयन, शिंजियांग-तिब्बत रेलवे का शिगात्से-पखुक्त्सो खंड और युन्नान-तिब्बत रेलवे का बोमी-राउक खंड शामिल है। बता दें, ल्हासा-न्यिंगची लाइन तिब्बत के दक्षिण-पूर्व और भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास से गुजरती है। इस लाइन को पूर्व में सिचुआन की प्रांतीय राजधानी और पश्चिमी चीन के एक प्रमुख आर्थिक और सैन्य केंद्र चेंगदू तक बढ़ाया जा रहा है, जिससे दो क्षेत्रीय राजधानियों के बीच यात्रा का समय 36 घंटे से घटकर 12 घंटे हो जाएगा।
फिलीपीन्स के गश्ती जहाज पर चीन का लेजर गन से हमला
उधर, दक्षिण चीन सागर में भी चीन की विस्तारवादी नीति का मामला सामने आया है। फिलीपींस के तट रक्षकों के अनुसार ये घटना 6 फरवरी को हुई, जब चीनी तट रक्षकों के जहाज ने फिलीपींस के जहाज को रोकने के लिए दो बार सैन्य-ग्रेड लेजर लाइट का इस्तेमाल किया। इससे जहाज पर सवार चालक दल के सदस्यों को कुछ देर के लिए दिखना बंद गया था। इस दौरान फिलीपीन के तटरक्षक गश्ती जहाज बीआरपी मलपास्कुआ को रोकने के लिए चीनी तटरक्षक जहाज खतरनाक तरीके से उससे लगभग 150 गज की दूरी पर आ गया था।
बता दें कि ये जहाज सैन्य दल के लिए खाना और रसद पहुंचाने जा रहा था। फिलीपींस ने कहा है कि हमारे जहाज को जानबूझकर रोका जाना, वेस्ट फिलीपींस सागर में उनके अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।
Published on:
13 Feb 2023 11:03 pm
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