
जयपुर। छोटी चौपड़ को चौकोर से गोल किए जाने के विरोध में गुरुवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त जिला कलक्टर राजीव कुमार पाण्डेय को ज्ञापन दिया। प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों को कहना था कि अब परकोटा विश्व विरासत सूची में शामिल हो चुका है। ऐसे में इसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करना ठीक नहीं है। सभी लोगों ने चौपड़ का मूलस्वरूप लौटाने की मांग की। ताल कटोरा एवं कदम्ब कुंड विकास समिति के अध्यक्ष मनीष सोनी ने कहा कि छोटी चौपड़ के बाहरी हिस्से को गोल कर दिया है और बड़ी चौपड़ पर भी ऐसा ही ढांचा तैयार किया जा रहा है। धरोहर का स्वरूप नष्ट करने का काम मेट्रो कर रही है। इसको तुरंत रोका जाए। जय भारत जन चेतना मंच के अध्यक्ष विक्रम सिंह तंवर ने बताया कि चौपड़ का अर्थ चौकोर से है। मूलस्वरूप बरकरार रहना चाहिए। यह हमारा इतिहास है। इसको आधुनिक बनाने की जरूरत नहीं है। करणी सेना के जिला सचिव जितेंद्र सिंह राजावत, कमलेश शर्मा तथा कौशल कोली ने भी चौपड़ों के स्वरूप में किए जा रहे बदलाव का विरोध किया।
मंत्री को लिखा पत्र
पूर्व उप महापौर मनोज भारद्वाज ने नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल को पत्र भेजा है। इस पत्र में लिखा है कि परकोटा वास्तु के आधार पर बसा हुआ शहर है। चौपड़ों का अपना महत्व है। पहले भी इनको गोल किया गया था, लेकिन लोगों के विरोध को देखते हुए इनको वापस मूल स्वरूप में लाया गया था। उन्होंने मांग की कि चौपड़ों को मूल स्वरूप में ही रखा जाए।
काम रोका, हैरिटेज कमेटी करेगी फैसला
उधर, छोड़ी चौपड़ को गोल करने को लेकर बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने गुरुवार को मेट्रो के अधिकारियों से बातचीत की और काम रुकवा दिया। जोशी ने कहा कि परकोटे की देखरेख के लिए बनी राज्य स्तरीय हैरिटेज कमेटी की बैठक में ही इसका फैसला होगा। तब तक काम बंद रखा जाएगा। उन्होंने यूडीएच सचिव भवानी सिंह देथा, स्मार्ट सिटी के सीईओ देशबंधु, मेट्रो के एमडी मुकेश सिंघल और नगर निगम प्रशासक वी पी सिंह से बातचीत कर आगे काम न करने को कहा।
Published on:
07 Feb 2020 09:34 am
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