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Cinematic bias: स्क्रीन पर बेहद कम नजर आते हैं Female AI scientist के किरदार

शोध : 'एआई' पर बनीं 142 प्रभावशाली फिल्मों के विश्लेषण में उजागर हुआ भेदभाव

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जयपुर

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Aryan Sharma

Feb 14, 2023

Cinematic bias: स्क्रीन पर बेहद कम नजर आते हैं Female AI scientist के किरदार

The Machine

लंदन. महिलाओं को घर से लेकर दफ्तर तक कई मोर्चों पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। अब एक नए अध्ययन में पाया गया है कि वास्तविक जीवन की तरह ही 'सिल्वर स्क्रीन' की काल्पनिक भूमिकाओं में भी महिलाओं को कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है। ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोध के अनुसार, जब किसी फिल्म में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) वैज्ञानिक का किरदार दिखाया जाता है तो उसके महिलाओं की तुलना में पुरुष, रोबोट या एलियन होने की संभावना अधिक होती है।

एआई वैज्ञानिकों की भूमिका में सिर्फ 8% महिलाएं
अध्ययन के लिए 1920 से 2020 के बीच एआई की विशेषता वाली 142 सबसे प्रभावशाली फिल्मों का विश्लेषण किया गया। फिल्मों में दिखाए गए 116 'एआई प्रोफेशनल' यानी एआई शोधकर्ताओं या इंजीनियर पात्रों का अध्ययन किया गया। मुख्यधारा की फिल्मों में पुरुषों के रूप में चित्रित एआई वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का आंकड़ा 92 फीसदी है। 'पब्लिक अंडरस्टैंडिंग ऑफ साइंस' में प्रकाशित शोध में कुल मिलाकर पाया गया कि फिल्मों में केवल 8% एआई वैज्ञानिक महिलाएं थीं। शोध में पाया कि इनमें 88 पुरुष किरदार थे, 10 पुरुष रोबोट या एलियन थे। 7 महिला पात्र थे और 2 फीमेल नॉन-ह्यूमन थीं। इनमें कुल आठ वैज्ञानिक और एक सीईओ वाली भूमिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व था।
महिला एआई क्रिएटर को परदे पर दिखाने वाली पहली बड़ी फिल्म 1997 में आई कॉमेडी 'ऑस्टिन पावर्स : इंटरनेशनल मैन ऑफ मिस्ट्री' थी, जिसमें Frau Farbissina का चरित्र है। अन्य महिला एआई वैज्ञानिकों में शामिल हैं: 'एवेंजर्स : इन्फिनिटी वॉर (2018)' में Shuri, 'ट्रैन्सेन्डन्स' (2014) में Evelyn Caster, 'द मशीन' (2013) में Ava, 'इंस्पेक्टर गैजेट' (1999) में Dr Brenda Bradford, 'रोबोट' (2004) में Dr Susan Calvin और 'घोस्ट इन द शेल' (2017) में Dr Dahlin। नॉन-ह्यूमन महिला एआई वैज्ञानिकों में 'ट्रांसफॉर्मर्स: द लास्ट नाइट' में Alien Quinterra और 'द इमोजी मूवी' में फीमेल इमोजी 'Smiler' शामिल हैं।

एआइ जगत में पुरुष पेशेवरों की अधिकता का असर
फिल्मों में एआई पुरुष किरदारों का यह आंकड़ा वर्तमान एआई वर्कफोर्स (78%) में पुरुषों के प्रतिशत से अधिक है। एआई जगत में पुरुष पेशेवरों की अधिकता के कारण इसका परिणाम स्क्रीन पर भी नजर आता है। निर्देशक से लेकर पटकथा लेखक तक एआई अनुसंधान वातावरण को सटीक रूप से चित्रित करने के लिए अपनी फिल्म में 70-85% पुरुषों को अलग-अलग भूमिकाओं में लेते हैं। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि इससे वास्तविक एआई जगत में काम कर रही महिलाओं की संख्या में और कमी आ सकती है।

कई स्तर पर हानिकारक हो सकती है यह प्रवृत्ति
अध्ययन के अनुसार, स्क्रीन पर महिला एआई इंजीनियरों की कमी की एक वजह कैमरे के पीछे महिलाओं का कम होना भी है। पिछली शताब्दी में एआई पर बनी एक भी फिल्म पूरी तरह से किसी भी महिला द्वारा निर्देशित नहीं की गई थी। सिनेमा में यह प्रवृत्ति कई स्तरों पर हानिकारक हो सकती है। इससे कॅरियर को चुनने पर असर पड़ेगा और महिलाएं इस ओर यह सोचकर कम रुचि लेंगी कि यह क्षेत्र सिर्फ पुरुषों के लिए है। दूसरा, इसका असर हायरिंग पैनल पर भी हो सकता है, जो एक टेक फर्म के लिए पुरुषों को ज्यादा फिट मान सकते हैं।

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