
जालोर/पत्रिका न्यूज नेटवर्क. परीक्षाओं में बार-बार दस्तावेज जांचने और पुलिस प्रमाणीकरण (Police verification) का झंझट खत्म नहीं हो रहा है। सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) की वन टाइम वेरिफिकेशन ( one time verification) की घोषणा दो साल से फाइलों से बाहर नहीं आ पाई है। राज्य में आरपीएससी (RPSC)और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (Rajasthan Staff Selection Board) भर्तियों को अंजाम देते हैं। आरपीएससी आरएएस एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती परीक्षा सहित कॉलेज लेक्चरर, स्कूल, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा सहित अन्य भर्तियां कराता है। कर्मचारी चयन बोर्ड कनिष्ठ टेक्निशियन, कनिष्ठ लेखाकार और अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं कराता है। सीएम अशोक गहलोत ने 2021 के बजट में वन टाइम वेरिफिकेशन लागू करने की घोषणा की थी। इसकी रूपरेखा मुख्यत: आईटी विभाग को बनानी है। आरपीएससी, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को भी सहयोग देना है। लेकिन दो साल बाद भी व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है।
तब आधार कार्ड बना था रुकावट:
आरपीएससी ने साल 2018 में वन टाइम वेरिफिकेशन की योजना बनाई थी। आधार कार्ड से अभ्यर्थियों के फॉर्म को लिंक करने का प्रस्ताव रखा गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा आधार कार्ड को कई योजनाओं के लिए बाध्यकारी नहीं मानने के आदेश दिए थे। इससे वन टाइम वेरिफिकेशन योजना खटाई में पड़ गई।
बने वन टाइम रजिस्ट्रेशन जैसी प्रोग्रामिंग:
आरपीएससी के लिए आईटी विभाग ने वन टाइम रजिस्ट्रेशन प्रोग्रामिंग बनाई है। अभ्यर्थी एक बार रजिस्ट्रेशन कराकर भर्ती परीक्षाएं दे सकते हैं। उन्हें बार-बार ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरना पड़ता है। ऐसी ही प्रोग्रामिंग वन टाइम वेरिफिकेशन के लिए जरूरी है।
फैक्ट फाइल:
आरपीएससी भरवाता है- 30 लाख फॉर्म
कर्मचारी चयन बोर्ड भरवाता है- 40 लाख फॉर्म
परीक्षावार दस्तावेजों की जांच- 5 से 7 बार
प्रति अभ्यर्थी आवाजाही का खर्चा-2 हजार रुपए तक
दस्तावेज खोने पर डुप्लीकेट लेने का खर्च- 500 से 1000 रुपए
Published on:
25 Feb 2023 11:00 am

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