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राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल पर बोले गहलोत, ‘सरकार को ब्लैकमेल करना उचित नहीं’

-सीएम ने कहा, कर्मचारी नेताओं को अपनी अंतरात्मा से पूछना चाहिए, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि पब्लिक सर्वेंट हैं, जनहित में सरकार के साथ खड़ें हों कर्मचारी

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ashok gehlot

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जयपुर। सरकार की ओर से 29 जिलों में शुरू किए गए प्रशासन गांवों के संग और शहरों के संग अभियान के बीच राजस्व विभाग से जुड़े पटवारी, गिरदावर और तहसीलदार सेवा के अधिकारियों की ओर से कार्य बहिष्कार और हड़ताल को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बड़ा बयान सामने आया है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जनता की समस्याओं के निदान के लिए प्रशासन शहरों के संग और गांवों के संग अभियान शुरू किया गया है तो ऐसे में समय सरकार पर दबाव बनाकर ब्लैकमेल करना उचित नहीं है।

सीएम ने कहा कि कर्मचारी नेताओं को भी अपनी अंतरात्मा से पूछना चाहिए कि ऐसे समय में क्य़ा उनका यह कदम सही है। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि पटवारी हो गिरदावर हो या फिर तहसीलदार हो या फिर जनप्रतिनिधि हो, हम सब पब्लिक सर्वेंट हैं। हमारी ड्यूटी होनी चाहिए कि प्रदेशवासियों की, गांव की, गरीब की सेवा करें। इसीलिए हम लोग पब्लिक सर्वेंट कहलाते हैं।

सीएम ने कहा कि जब सरकार ने इतना बड़ा फैसला लिया हैं प्रशासन शहरों के संग और गांवों के संग अभियान शुरू किया है तो ऐसे वक्त में तो अगर राजस्व कर्मचारियों को सरकार से कोई शिकायत भी है तो कर्मचारियों को अपनी मांगों को दरकिनार कर सरकार के साथ खड़े होना चाहिए। कर्मचारियों को कहना चाहिए कि प्रदेशवासियों की सेवा करने में कोई हम कोई कमी नहीं छोड़ेंगे। रेवेन्यू विभाग से संबंधी जो मसले हैं उनको शिविरों में हल कराएंगे।


सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि किसान लंबे समय से हम इंतजार कर रहा है कि हमारी समस्याओं का समाधान इन कैंपों में होगा। वहीं शिविरों के शुरू होने के वक्त राजस्व कर्मचारियों की इस तरह हड़ताल करना, कार्य बहिष्कार की बात करना यह कहां की समझदारी है। सीएम ने कहा कि पब्लिक इनके बारे में क्या सोच रही होगी।

कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखती है सरकार
सीएम ने कहा कि सरकार हमेशा कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखती है। उसी को ध्यान में रखकर सरकार फैसले लेती है। लेकिन कई फैसले ऐसे होते हैं जो हम एकदम नहीं ले सकते हैं। उसके लिए हमें परीक्षण करना पड़ता है। कई दूसरी सेवाओं में जो लोग हैं उन पर इसका क्या इफेक्ट पड़ेगा। कौनसा फैसला लेने में हम सक्षम हैं और कौनसे फैसले हम परीक्षण के बाद लेंगे। इन सब बातों का हमें ध्यान रखना पड़ता है।