
सुप्रीम कोर्ट—सीएम भजनलाल शर्मा। पत्रिका फाइल फोटो
Rajasthani Language: जयपुर। सुप्रीम कोर्ट के स्कूली शिक्षा में राजस्थानी पढ़ाए जाने के आदेश के बाद प्रदेश के शिक्षा ढांचे में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। दरअसल, अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि राजस्थान में मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मेवाती और वागड़ी जैसी कई बोलियां है, तो पढ़ाई किसमें होगी? विशेषज्ञों ने इस भ्रांति को सिरे से खारिज किया है। असल स्थिति यह है कि राजस्थानी एक मानक भाषा है, जबकि ये सभी इसकी क्षेत्रीय बोलियां हैं।
राज्य की सभी बोलियां का मिश्रण ही राजस्थानी भाषा है। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जोधपुर), मोहन लाल सुखाड़िया विवि (उदयपुर) और कोटा ओपन विवि सहित कई संस्थानों में लगभग 3000 छात्र राजस्थानी भाषा में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं। यहां तक कि नेट परीक्षा में भी राजस्थानी का स्वतंत्र पेपर होता है। राज्य में 11वीं-12वीं और स्टेट ओपन स्कूलों में यह पहले से पढ़ाई जा रही है।
प्रदेश में अब तक कक्षा 6 के बाद त्रिभाषा फॉर्मूला' के तहत छात्र हिंदी और अंग्रेजी के साथ संस्कृत या उर्दू चुनते थे, क्योंकि राजस्थानी का विकल्प ही नहीं था। अब सरकार को प्राथमिक स्तर से ही इसे लागू करने के लिए तैयारी करनी होगी। एनईपी में प्राथमिक स्तर पर ही मातृभाषा में पढाई कराने पर जोर दिया गया है।
सीबीएसई में बदलाव: निजी-सीबीएसई स्कूलों में इसे लागू करने के लिए सरकार को एनसीईटी के सिलेबस में संशोधन कर राजस्थानी को शामिल कराना होगा।
शिक्षकों की भर्ती: वर्तमान में स्कूल शिक्षा में व्याख्याताओं के 53 स्वीकृत पदों में से 17 भरे हैं। प्राथमिक स्तर पर इसे लागू करने के लिए हजारों नए राजस्थानी शिक्षकों की भर्ती होगी। निजी स्कूलों को भी अनिवार्य रूप से विशेषज्ञ शिक्षक रखने होंगे।
सिलेबस कमेटी का गठन: सरकार को प्राथमिक कक्षाओं के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करना होगा। इसके लिए भाषाविदों और विषय विशेषज्ञों की उच्च-स्तरीय कमेटी बनानी होगी, जो विज्ञान और गणित विषयों को भी मातृभाषा में समझाने का खाका तैयार करेगी।
बच्चों को क्या फायदा: विशेषज्ञों का मानना है कि जब बच्चा अपनी मातृभाषा में प्राथमिक स्तर से पढ़ाई करता है तो उसकी सीखने की क्षमता 40 फीसदी तक बढ़ जाती है। अपनी संस्कृति से जुड़ाव होने के कारण ड्रॉपआउट रेट में कमी आएगी और बच्चों का मानसिक विकास अधिक स्वाभाविक होगा।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मूक राजस्थान को जुबान प्रदान करने जैसा है। अब राज्य सरकार को भी विषय विशेषज्ञों के माध्यम में श्रेष्ठ सिलेबस का निर्माण करना चाहिए। इसके अलावा राजस्थानी के शिक्षकों की भर्ती करनी चाहिए, जिससे दक्ष शिक्षक मिल सके।
-हेमेन्द्र सिंह, शोधार्थी, राजस्थानी भाषा
सरकार को अब कमेटी बनानी चाहिए। कमेटी में योग्य विशेषज्ञों को शामिल करना चाहिए। इतने वर्षों से हमारी भाषा बिखरी है। अभी भी समय है कि हमारी भाषा को बच्चों को पढ़ाया जाए। मैं 10 साल से लड़ाई लड़ रहा हूं। सुप्रीम कोर्ट से हमें जीत मिली है।
कल्याण सिंह शेखावत, पूर्व प्रोफसर एवं विभागाध्यक्ष राजस्थानी भाषा जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर
Updated on:
13 May 2026 08:28 am
Published on:
13 May 2026 08:22 am
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