प्रदेश में कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की ओर से की जा रही आत्महत्याओं की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अब प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने कोचिंग संस्थानों और हॉस्टलो पर लगाम लगाने की तैयारी कर ली है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं जिसके मुताबिक हर कोचिंग संस्थान को अब ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों की शिकायत का हल तुरंत निकल सके।
प्रदेश में कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की ओर से की जा रही आत्महत्याओं की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अब प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने कोचिंग संस्थानों और हॉस्टलो पर लगाम लगाने की तैयारी कर ली है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं जिसके मुताबिक हर कोचिंग संस्थान को अब ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों की शिकायत का हल तुरंत निकल सके। यदि विद्यार्थी बीच में ही कोचिंग या हॉस्टल छोड़ता है तो उसकी फीस भी लौटाना जरूरी होगा। इतना ही नहीं किसी विद्यार्थी के अस्वस्थ होने पर उनके अभिभावकों के आने तक उनके केयर टेकर के रूप में काम करना होगा।कोचिंग संस्थान में विद्यार्थियों की क्लीनिकल काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी साथ ही विद्यार्थियों के लिए मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन केंद्र को वैलनेस सेंटर के रूप में संचालित किया जाना जरूरी होगा।
टेस्ट का रिजल्ट नहीं कर सकेंगे प्रकाशित
कोचिंग संस्थान अब विद्यार्थियों के टेस्ट का रिजल्ट प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। देखने में आया है कि टेस्ट में कम नंबर आने पर विद्यार्थी तनाव में आ जाते हैं और कई बार गलत कदम उठा लेते हैं। यदि कोई विद्यार्थी मानसिक रूप से परेशान है या तनाव में तो कोचिंग संस्थान / हॉस्टल ऐसे विद्यार्थी के लिए मनोविशेषज्ञ की व्यवस्था भी करेगा।
राज्य स्तर पर होगा कमेटी का गठन
कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने और तनाव को कम करने संबंधी निर्देशों की क्रियान्विति संस्थान कर रहे हैं अथवा नहीं इस पर नजर रखने का काम एक राज्य स्तरीय कमेटी करेगी। जिसके अध्यक्ष उच्च शिक्षा विभाग के शासन सचिव होंगे। कमेटी में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा की ओर से नामित प्रतिनिधि, शासन सचिव स्वायत्त शासन की ओर से नामित प्रतिनिधि, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग की ओर से नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे।
करनी होगी यह भी व्यवस्थाएं
- कोचिंग संस्थान और अभिभावकों के पास विद्यार्थी के आवास का पता और मोबाइल नंबर होना जरूरी होगा।
- हॉस्टल और पीजी सुविधाओं के आसपास पुलिस गश्त होगी जरूरी
- पुलिस थाने में छात्र छात्राओं के लिए अलग से हेल्प डेस्क जरूरी
- नए कोचिंग सेंटर खोलने से पहले देखना जरूरी होगा कि आसपास कोई शराब या मादक पदार्थ की ब्रिकी नहीं होती हो
- कोङ्क्षचग संस्थान में आने वाले विद्यार्थियों व अन्य लोगों के लिए एक मूवमेंट रजिस्टर या इलेक्ट्रॉनिक उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था की जाएगी।
- विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोचिंग संस्थानों में जागरुकता सप्ताह आयोजित किया जाएगा। इसके लिए जिला स्तरीय कमेटी अनुभवी मनोविशेषज्ञों की मदद लेगी।
- तनाव रोकने के लिए कार्यशालाओं का होगा आयोजन। जिला प्रशासन को कोचिंग संस्थानों से मासिक कार्यक्रम तैयार करवा कर करवानी होगी क्रियान्विति
- पुलिस थाने का सम्पर्क नंबर और हेल्पलाइन नंबर विद्यार्थियों को देने होंगे।
- पीजी और हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए एक यूनिफॉर्म फॉर्मेट लागू किया जाएगा, जिसमें उनकी पूरी डिटेल, अभिभावकों के सम्पर्क की सूचना, मासिक किराया, रिफंड नीति, दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी और कोचिंग संस्थान के नियमों की जानकारी दी जाएगी।
- कोचिंग संस्थान/ हॉस्टल में कार्यरत पूरे स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन होगा जरूरी
- विद्यार्थियों के कोचिंग आने जाने के समय की कारण सहित एंट्री रजिस्टर में करवानी होगी।
- हॉस्टल व कोचिंग में बाहर से आने वाले व्यक्तियों का पूरा रिकॉर्ड व्यक्तिगत पहचान, मोबाइल नंबर, आने का कारण आदि रजिस्टर में अंकित करना होगा जरूरी।
- शाम को कोङ्क्षचग आने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए वहां रोशनी रखी जाना जरूरी होगा।
- कोचिंग / हॉस्टल में सुरक्षा गार्ड के साथ सीसीटीवी कैमरे हो
- शिकायत मिलने पर हॉस्टल, मैस, टिफिन सेवा देने वालों की जांच चिकित्सा व रसद विभाग के संयुक्त दल से करवाई जाएगी।
- कोचिंग संस्थान में विद्यार्थियों की मदद के लिए रेफरल सेवाएं जैसे अस्पताल, डॉक्टर्स आदि की सूची लगाना जरूरी होगा।
- कोचिंग संस्थान में भी प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था हो।
- कोचिंग / हॉस्टल संचालकों को किसी विद्यार्थी के अस्वस्थ होने पर उनके अभिभावकों के आने तक उनके केयर टेकर के रूप में काम करना होगा।
इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं,स्वयंसेवी संगठनों के वॉलेटियर्स, एनसीसी, एनएसएस के वॉलंटियर्स और रिटायर्ड राजकीय कार्मिकों का सहयोग लिया जाएगा।
- कोचिंग संस्थान में विद्यार्थियों की क्लीनिकल काउंसलिंग की व्यवस्था की जाए।
- कोचिंग संस्थान में विद्यार्थियों के लिए मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन केंद्र को वैलनेस सेंटर के रूप में संचालित किया जाए।
- यदि कोई विद्यार्थी बिना सूचना दिए तीन दिन अनुपस्थित रहे तो उसके अभिभावकों से सम्पर्क कर अनुपस्थित रहने का कारण कोचिंग संस्थानों को पता करना होगा।
- ऑनलाइन क्लास में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स का भी पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।
- कोचिंग सेंटर में एक ई लर्निंग सेंटर स्थापित करना होगा, जिसमें इंटरनेट और कम्प्यूटर सुविधा हो। यदि कोई विद्यार्थी कोई लेक्चर अटैंड नहीं कर पाया है तो ई लेक्चर की मदद ले सके।
- एक बार कोचिंग में एडमिशन लेने के बाद अगर कोई स्टूडेंट वहां से निकलना चाहे तो उसे शेष अवधि की जमा फीस 10 दिन में लौटानी होगी। यदि वह कोचिंग के हॉस्टल में रह रहा है तो मैस फीस भी लौटानी होगी।
- कोचिंग संस्थान को ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि स्टूडेंट्स और उनके परिजनों की शिकायत का तत्काल हल हो सके।
- कोचिंग संस्थान टेस्ट रिजल्ट प्रकाशित नहीं कर सकेंगे।
- विद्यार्थी के साथ उनके अभिभावकों का भी ओरिएंटेशन करवाना होगा।
30 दिन में शिकायतों का करना होगा शिकायतों का निस्तारण
कोचिंग और हॉस्टल से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायतों पर कार्यवाही करने उनकी जांच करने के लिए हर जिले में कोचिंग संस्थानों का पूरा रिकॉर्ड रखने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। यह कमेटी जिले के सभी कोचिंग सेंटर्स पर नियंत्रण रखेगी। अथॉरिटी को अपने ऑफिस में एक हेल्पलाइन भी संचालित करनी होगी ताकि कोई भी कोचिंग का विद्यार्थी या उसके अभिभावक अपनी शिकायत या पूछताछ के लिए संपर्क कर सकें। जिला कलेक्टर की ओर से एसडीएम स्तर के अधिकारी को नोडल आफिसर बनाया जाएगा। जिसमें पुलिस उपाधीक्षक और माध्यमिक शिक्षा का जिला शिक्षा अधिकारी सदस्य होंगे। सरकारी पीजी कॉलेज का प्रिंसिपल इसका मेंबर सेक्रेटरी होगा। दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद यह जांच कमेटी पेनल्टी, रजिस्ट्रेशन रद्द करने जैसी सिफारिश के साथ अपनी रिपोर्ट डिस्ट्रिक्ट अथॉरिटी के चेयरमैन को सौंपेगी।
जिला स्तरीय कमेटी के फैसले से असंतुष्ट होने वाले कोचिंग संस्थान, विद्यार्थी या अभिभावक राज्य सरकार की अपीलेट अथॉरिटी में अपील कर सकेंगे। यह अपील 30 दिन के भीतर करनी होगी। अपीलेट अथॉरिटी में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव चेयरमैन होंगे। इसमें डिप्टी सेक्रेटरी, पुलिस महानिदेशक या उनके नॉमिनी,कॉलेज शिक्षा कमिश्नर,उच्च शिक्षा विभाग के वित्तीय सलाहकार और राजस्थान विधि सेवा के अफसर सदस्य होंगे। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव इसमें मेंबर सेक्रेटरी होंगे। इस अपीलेट अथॉरिटी को दोनों पक्षों की सुनवाई करके 45 दिन के अंदर अपना फैसला सुनाना होगा। अपीलेट अथॉरिटी का फैसला अंतिम होगा।