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AI क्रांति: बिना छुए रिपेयर होंगी फीकी पड़ती हवेलियां और किले, राजस्थान को भी मिल सकती है संजीवनी

मल्ला रेड्डी यूनिवर्सिटी की तकनीक से राजस्थान के बूंदी-जैसलमेर-उदयपुर के म्यूरल्स को मिल सकती है नई जिंदगी

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Jan 20, 2026

मोहित शर्मा.

AI Heritage Restoration: जयपुर. हैदराबाद में मल्ला रेड्डी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पुरातात्विक वस्तुओं की डिजिटल रेस्टोरेशन के लिए एक क्रांतिकारी AI-आधारित हाइब्रिड डीप लर्निंग इनेबल्ड इमेज इनपेंटिंग फॉर स्मार्ट हिस्टोरिकल आर्टिफैक्ट रेस्टोरेशन विधि विकसित की है। यह तकनीक क्षतिग्रस्त ऐतिहासिक कलाकृतियों, म्यूरल्स (भित्तिचित्रों), पॉटरी (मिट्टी के बर्तन), मूर्तियों और पांडुलिपियों को बिना छुएडिजिटली रिपेयर कर सकती है। यह नॉन-इनवेसिव (गैर-आक्रामक) तरीका म्यूजियमों, संरक्षण टीमों और पुरातत्वविदों के लिए एक बड़ा विकल्प साबित हो रहा है, जहां पारंपरिक रेस्टोरेशन में समय, श्रम और मानवीय त्रुटि का खतरा रहता है। अभी डायरेक्ट AI से हेरिटेज रेस्टोरेशन का कोई एक्टिव प्रोजेक्ट नहीं चल रहा (जैसे म्यूरल्स को AI से रिपेयर), लेकिन डिजिटल प्रिजर्वेशन जारी है, और AI पॉलिसी 2026 से यह क्षेत्र जल्दी एक्सपैंड हो सकता है। आम बातचीत में लोग इसे "एआई इनपेंटिंग तकनीक" या "डिजिटल रेस्टोरेशन AI" भी कहते हैं।

राजस्थान के लिए वरदान साबित हो सकती है HDLIP-SHAR Technology

राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहरें– बूंदी के चित्रशाला म्यूरल्स, जैसलमेर की हवेली भित्तिचित्र, आमेर-उदयपुर के फ्रेस्को और शेखावाटी की पेंटेड हवेलियां – समय, मौसम और उपेक्षा से तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही हैं। लेकिन अब हैदराबाद की मल्ला रेड्डी यूनिवर्सिटी ने AI की मदद से एक क्रांतिकारी समाधान पेश किया है, जो इन कलाकृतियों को बिना छुएडिजिटली रिपेयर कर सकता है। यह Hybrid Deep Learning-Enabled Image Inpainting for Smart Historical Artifact Restoration तकनीक राजस्थान जैसे राज्य के लिए वरदान साबित हो सकती है, जहां 600 हवेलियां UNESCO लिस्ट में शामिल करने की कतार में हैं, लेकिन संरक्षण की कमी से खतरे में हैं।

राजस्थान में है इस AI तकनीक की सबसे ज्यादा जरूरत?

राजस्थान में ASI द्वारा संरक्षित 163 साइट्स हैं, जिनमें कुम्भलगढ़, रणथंभौर, जैसलमेर फोर्ट और बूंदी के टारागढ़ पैलेस के 18वीं सदी के म्यूरल्स शामिल हैं। ये भित्तिचित्र फीके पड़ रहे हैं, क्रैक्स आ रहे हैं और रंग उखड़ रहे हैं – वजह है रेगिस्तानी मौसम, धूल, नमी और रखरखाव की कमी। शेखावाटी क्षेत्र की हवेलियां, जहां दुनिया भर के टूरिस्ट आते हैं, उपेक्षा से जर्जर हो रही हैं। हाल ही में सरकार ने 600 हवेलियों को UNESCO हेरिटेज में शामिल करने की योजना बनाई है, लेकिन फिजिकल रेस्टोरेशन महंगा, समय लेने वाला और कभी-कभी अपरिवर्तनीय नुकसान पहुंचा सकता है। यहां HDLIP-SHAR तकनीक गेम-चेंजर बन सकती है – यह डिजिटल इनपेंटिंग से मिसिंग पार्ट्स को मूल स्टाइल में भर देती है, रिवर्सिबल है और फिजिकल टच की जरूरत नहीं।

कैसे काम करती है यह AI जादूगरी ?

रिसर्च पेपर "AutomatedImageInpaintingforHistoricalArtifact Restoration..." Nature की ScientificReports में यह पब्लिश हुआ। यह AI की जादूगरी से होता है – पूरी प्रक्रिया डिजिटल और नॉन-इनवेसिव (बिना छुए) है। हवेलियों, किलों या म्यूरल्स को फिजिकल टच किए बिना रिपेयर करती है।

सबसे पहले फोटो/इमेज कैप्चर करना उसके बाद हवेली या किले की क्षतिग्रस्त दीवार/म्यूरल की हाई-रेजोल्यूशन फोटो ली जाती है। AI पहले इमेज को क्लियर करता है। MedianFiltering से नॉइज, धूल या छोटे आर्टिफैक्ट्स हटाए जाते हैं। Contrastenhancement से फीके रंगों को बेहतर दिखाया जाता है। यह सब कंप्यूटर पर होता है – कोई फिजिकल क्लीनिंग नहीं। डैमेज पहचानना और HybridSqueezeNetCNN मॉडल इमेज को स्कैन करता है और गहराई से समझता है। क्रैक्स, मिसिंग पार्ट्स (उखड़े हुए हिस्से) फीके/फेडेडटेक्सचर और कलर्स AI मूल आर्ट स्टाइल, पैटर्न, कलर पैलेट और हिस्टोरिकल कंटेक्स्ट को पहचानता है। क्षतिग्रस्त क्षेत्र अलग करना, U-Net मॉडल डैमेज्ड पार्ट्स को एक्यूरेटली मार्क करता है – जैसे "यहां क्रैक है, यहां रंग उखड़ा है"। यह लोकलाइजेशन बहुत प्रिसाइज होती है। रिपेयर/इनपेंटिंग और फ्लोरल डिजाइन या राजसी दृश्य को समझकर मिसिंग एरिया को भरता है। यह रिवर्सिबल है अगर जरूरत पड़े तो ओरिजिनल इमेज वापस लौटाई जा सकती है।

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