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किसानों को फसल खराबे के मुआवजे का इंतजार

जिले में बहुतायत में बोई जाने वाली जिले की खरीब की प्रमुख फसल सोयाबीन  के खराबे की रिपोर्ट अभी तक भी नहीं आने से किसानों के चहरों पर अभी चिंता के बादल मंडरा रहे हैं। किसानों को यह आशा थी, रबी की फसल की बुवाई के समय सोयाबीन, उड़द की फसल खराबे का मुआवजा मिल जाएगा।

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Shailendra Tiwari

Nov 05, 2015

जिले में बहुतायत में बोई जाने वाली जिले की खरीब की प्रमुख फसल सोयाबीन के खराबे की रिपोर्ट अभी तक भी नहीं आने से किसानों के चहरों पर अभी चिंता के बादल मंडरा रहे हैं। किसानों को यह आशा थी, रबी की फसल की बुवाई के समय सोयाबीन, उड़द की फसल खराबे का मुआवजा मिल जाएगा।


लेकिन गिरदावरी करने की समय सीमा के समाप्त होने के पखवाड़ा निकल जाने के बाद भी किसी अधिकारियों के पास गिरधावरी रिपार्ट तैयार नहीं है। किसान पसोपेश में है कि मुआवजा मिलेगा भी या नहीं। किसान इसके लिए पता कर रहे हंै कि मुआवजा कब मिलेगा। कितना मिलेगा इसकी पूछ-परख कर रहे हैं।


इतने हैक्टेयर में हुई थी खरीब की बुवाई

जिलेभर में सोयाबीन की करीब 2 लाख 32 हजार 892, उड़द 25 हजार 5 सौ 5, मक्का 3 हजार 6 सौ 70 अन्य फसलों में 15 हजार 3 सौ 24 सहित कुल 3 लाख 4 हजार 3 सौ 91 हैक्टेयर क्षेत्रफल में खरीब की फसलों की बुवाई हुई थी। इसमें लगातार बारिश होने से तथा फसलों के पकने के समय बारिश के जल्दी चले जाने व इल्ली के प्रकोप के कारण किसानों की फसले कई क्षेत्रों में पूरी तरह से खराब हो चुकी थी। लेकिन अभी तक भी राजस्व विभाग द्वारा गिरदावरी की रिपोर्ट तैयार नहीं होने से किसानों को मुआवजे का इंतजार करना पड़ रहा है।


यह था गिरदावरी करने का समय

आपदा,प्रबन्धन एवं सहायता विभाग की ओर से जिले के पटवारियों व तहसीदारों के माध्यम से जिले के समस्त काश्तकारों के खेतों में मौके पर जाकर खराबे का सही आंकलन किया जाना था जिसमें प्रमाणित काश्तकारों की सूची भी गिरदावरी के साथ-साथ ही तैयार की जानी थी। लेकिन, अभी तक गिरदावरी रिपार्ट तैयार नहीं होने से किसान की चिंता कम नहीं हो रही है।


आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे किसान

किसानों की फसले के खराब होने के चलते किसान रबी की फसलों की बुवाई कर्ज लेकर कर रहे हैं। अब किसानों की चिंता बढ़ रही है।

खरीब की फसलों की गिरदावरी रिपोर्ट कल तक तैयार हो जाएगी।

हरसहाय जांगीड,
तहसीलदार झालरापाटन तहसील


राजस्व विभाग की मिटिंग होगी उसके बाद वहां से सर्वे की रिपोर्ट की आने के बाद ही पता चलेगा की जिले में कितने किसानों को मुआवजा मिलेगा।

कैलाश चन्द मीणा,
उपनिदेशक कृषि विस्तार झालावाड़


किसानों को लगातर तीन साल से फसलें खराब होने से किसानों को कर्ज का सामना करना पड़ रहा है। इस साल एक बीघे में 20-30 किलो सोयाबीन की फसल ही निकली है। एक बीघे में करीब 4 हजार रुपए का खर्चा हुआ और फसल 7-8 सौ रुपए की निकली। ऐसे में किसानों को सरकार से मुआवजा मिल जाए तो किसानों को राहत मिल सकती है।खराबे के लिए कई बार तहसीलदार को ज्ञापन दिए गए है। लेकिन अभी तक तो कोई सूचना नहीं है। ऐसे में सहकारी समिति से लोन ले रखा है। लोन चुकाने की चिंता बनी हुई है। वर्तमान में किसानों को आर्थिक तंगी के दौर से गुजरना पड़ा है।

जुझारसिंह,
किसान भूमाड़ा निवासी


नदी के पास जिन किसानों के खेत है उनकी फसलें बाढ़ से पूरी फसल खराब हो गई हंै। मेरे पास तीन बीघा जमीन है। 20 हजार रुपए का कर्जा ले रखा है। अब जैसे तैसे करके रबी की फसल की बुवाई कर रहे हैं। कलक्टर साहब व तहसीलदार ने मौका देखा था। लेकिन मुआवजे की अभी तक कोई सूचना नही है।

विनोद सिंह जादौन,
पटपडिय़ा


एक बीघे में 30 किलो ही सोयाबीन निकली क्षेत्र में कई किसानों के तो बिल्कुल कुछ भी नहीं निकली है। सोयाबीन व मक्का खराब हो गई तथा तिल्ली गलकर नष्ट हो गई। उड़द पीले पड़ गएथे। जिससे कई लोगों ने तो फसलों में पशुओं को छोड़ दिया था। इस बार पैदावार कम हुई तथा कटाई आदि पर ही ज्यादा खर्चा हुआ है।

जयन्तसिंह,
दतीला निवासी