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‘कांग्रेस और सत्तारूढ़ टीवीके ने राज्य के हितों के साथ कर लिया समझौता’

जयपुर

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Newsdesk

Aug 03, 2026

Rajasthan

चेन्नई. तमिलनाडु की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। डीएमके के वरिष्ठ नेता और चेन्नई सेंट्रल से सांसद दयानिधि मारन ने कांग्रेस पार्टी और सत्तारूढ़ दल पर राज्य के हितों के साथ समझौता करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि जो लोग कावेरी जल विवाद, मेकेडाटू बांध और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को पूरी तरह रद्द करने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चुप हैं, वे तमिलनाडु की जनता के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।

दयानिधि मारन ने सीधे तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया तमिलनाडु दौरे पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो नेता तमिलनाडु आते हैं, लेकिन राज्य के कावेरी नदी के अधिकारों और कर्नाटक के प्रस्तावित मेकेडाटू बांध का विरोध नहीं करते, वे जनता को धोखा दे रहे हैं।

सांसद ने उन नेताओं की भी आलोचना की जो केवल परीक्षा में हो रही गड़बड़ियों या प्रश्नपत्र लीक होने पर बात करते हैं, लेकिन इसे पूरी तरह से समाप्त करने की मांग नहीं करते। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु का हमेशा से रुख इस परीक्षा को पूरी तरह हटाने का रहा है, न कि इसमें सुधार करने का।

मारन ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे दूसरे दलों की खरीद-फरोख्त की तो निंदा करते हैं, लेकिन सत्तारूढ़ दल द्वारा की जा रही ऐसी ही हरकतों पर चुप रहकर दोहरा रवैया दिखा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन द्वारा आलोचनात्मक सोशल मीडिया संदेश लिखने वालों की गिरफ्तारी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल के इस्तेमाल की भी निंदा की।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि तमिलनाडु के हालिया दौरे के दौरान जब राजनीतिक उपदेश दिए जा रहे थे, तब उन्हें राज्य के साथ हुए ये सारे धोखे याद आ रहे थे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ होने के बावजूद प्रांतीय स्तर पर द्रमुक का यह रुख दिखाता है कि तमिलनाडु में पानी और शिक्षा जैसे क्षेत्रीय मुद्दे किसी भी राजनीतिक गठबंधन से ऊपर हैं। राज्य की राजनीति के समीकरणों को देखते हुए द्रमुक अपने मतदाताओं को यह संदेश देना चाहती है कि वह राज्य के अधिकारों के लिए राष्ट्रीय स्तर के सहयोगियों पर भी दबाव बनाने से पीछे नहीं हटेगी।