
जयपुर। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल, महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुष्मिता देव, कांग्रेस महासचिव अजय माकन सहित तकरीबन 5 हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं के टि्वटर अकाउंट ब्लॉक होने के बाद कांग्रेस ने देश भर में ट्विटर के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है।
कांग्रेस ने देश भर में शनिवार को स्पीक अप अगेंस्ट टि्वटर हिप्पोक्रेसी(#SpeakUpAgainstTwitterHypocrisy) कैंपेन के जरिए ट्विटर का विरोध जताया। हालांकि विरोध के बीच ही ट्विटर ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत तमाम नेताओं और राजस्थान कांग्रेस के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट को अनब्लॉक कर दिया है।
स्पीकअप अगेंस्ट ट्विटर हिप्पोक्रेसी कैंपेन में राजस्थान कांग्रेस के भी अधिकांश नेताओं ने ट्विटर पर वीडियो संदेश पोस्ट करके विरोध जताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि भारत में ट्विटर मोदी सरकार के दबाव में आकर कांग्रेस के नेताओं के टि्वटर अकाउंट को ब्लॉक कर रहा है।
राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने ट्विटर पर संदेश पोस्ट करते हुए लिखा कि मोदी सरकार के दबाव में आकर ट्विटर ने राहुल गांधी का टि्वटर अकाउंट ब्लॉक कर दिया है। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ पूरा देश मुखर होकर इसका विरोध कर रहा है।
डोटासरा ने वीडियो संदेश पोस्ट कर कहा, हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से मिली आजादी को हमसे कोई छीन नहीं सकता। कमजोर और गरीब लोगों की आवाज उठाना लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है और इस अधिकार को कोई हमसे छीन नहीं सकता। हम ट्विटर से यह मांग करते कि मोदी सरकार के दबाव में भारत और भारतीयों की आवाज को दबाना बंद करें और भाजपा से डरना बंद करें।
गहलोत सरकार में ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला ने लिखा कि आप किसी के विचारों से सहमत हो या असहमत, विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए। केंद्र सरकार के दबाव में ट्विटर ने हमारे नेताओं के ट्विटर अकाउंट ब्लॉक किए हैं हम उसकी निंदा करते हैं।
कांग्रेस की पूर्व मीडिया चेयरपर्सन अर्चना शर्मा ने वीडियो संदेश पोस्ट करते हुए लिखा कि मासूम बच्ची के साथ बलात्कार व हत्या के बाद पीड़ित परिजनो के प्रति संवेदना व्यक्त करने की बजाए केंद्र सरकार न्याय के लिए उठने वाली आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
पीसीसी सचिव जसवंत गुर्जर ने कहा कि अन्याय व अत्याचार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी पहले भी आवाज उठती रही है आगे भी उठती रहेगी, लेकिन जिस तरह से केंद्र सरकार ने आवाज को दबाने का काम किया है वह पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।
Published on:
14 Aug 2021 07:39 pm
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