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विश्वेंद्र सिंह: एक धर्म विशेष की वजह से महिला का इलाज नहीं किया…गर्ग: पिछले पांच दिनों में आठ धर्म विशेष महिलाओं की डिलीवरी हुई

राज्य सरकार के दो मंत्री आमने-सामने

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जयपुर. कोराना संक्रमण के बीच राज्य सरकार के दो मंत्री आमने-सामने हो गए। पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने शनिवार को ट्वीट कर लिखा कि भरतपुर के जनाना अस्पताल में एक धर्म विशेष गर्भवती महिला का इलाज करने से मना कर दिया। चिकित्सक ने कहा कि आप एक धर्म विशेष से ताल्लुक रखती हैं। जयपुर जाकर इलाज कराइए। इस दौरान अस्पताल कॉरिडोर में प्रसव के दौरान बच्चे ने दम तोड़ दिया। यह बेहद शर्मनाक घटना है। भरतपुर के स्थानीय विधायक, जो चिकित्सा मंत्री भी हैं और भरतपुर शहर अस्पताल की यह स्थिति है। एक अन्य ट्वीट में सिंह ने लिखा कि निश्चित रूप से पूरे देश के लिए जमात खतरनाक रहा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि एकधर्म विशेष में आस्था रखने वाले नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाए।
इस घटनाक्रम पर तकनीकी एवं संस्कृत शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष गर्ग ने कहा कि यह बात बेबुनियाद है। पिछले पांच दिनों में आठ धर्म विशेष महिलाओं की डिलीवरी उसी अस्पताल में हुई है। जांच रिपोर्ट में पीडि़ता के साथ आई महिलाओं ने कहा कि इलाज में कोई कोताही चिकित्सकों ने नहीं बरती। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि ६.५ माह का बच्चा था और उसका वजन महज ९०० ग्राम था। क्रिटिकल केस होने की वजह से जयपुर रेफर करने की बात चिकित्सक ने कही थी। प्रसव के बाद भी चिकित्सकों ने भर्ती कर इलाज किया और महिला अस्पताल में भर्ती है।

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तीन दिन से सिंह के निशाने पर गर्ग
शुक्रवार को ट्वीट कर सिंह ने ट्विटर पर लिखा कि वे आखिरकार स्थिति का जायजा लेने के लिए पहुंचे । मुझे आशा है कि उनकी बैठकें केवल फोटोबाजी के अवसर से ऊपर ही रहीं होंगी। इससे पहले विश्वेंद्र सिंह के पुत्र अनिरुद्ध सिंह ने ट्विटर पर लिखा कि मैं भावुक इस बात से भी हूं कि महाराजा साहब की मदद के लिए भरतपुर शहर के विधायक गायब हैं। अखिर कहां है यह विधायक जीï? जनता पूछ रही है।

गर्ग बोले, मेरे बराबर कोई भरतपुर गया ही नहीं होगा
राजस्थान पत्रिका से बातचीत में गर्ग ने कहा कि बातें जो भी हों, लेकिन भरतपुर जिले के इतिहास में मुझसे सक्रिय मंत्री कोई नहीं रहा होगा। सप्ताह में दो दिन भरतपुर ही रहता हूं। मेरे साथ जनता है, इसलिए मुझे किसी की चिंता है। मुझे पता नहीं कि कुछ लोगों को मेरे से डर क्यों लगता है? पिछले २०-२५ सालों से अस्पतालों की स्थिति खराब थी, इनको दुरुस्त करना हमारी प्रथमिकता में है।