
congress election
जयपुर। राजस्थान से लेकर दिल्ली तक सोमवार को कांग्रेस के चार प्रदेश सह प्रभारी और स्क्रीनिंग कमेटी के दो सदस्यों पर पैसा लेकर प्रत्याशियों के पैनल में नेताओं के नाम शामिल करने के का हल्ला मच गया।
एक वीडियो भी वायरल हो गया। इसमें शौचालय में पोस्टर चिपका नजर आ रहा है। उसमें लिखा है कि फलौदी की टिकट बिक गया। मैसेज में यह पोस्टर कांग्रेस मुख्यालय के शौचालय में चिपका होने का दावा किया।
आरोप यहीं नहीं थमे। चर्चाएं शुरू हो गईं कि आपराधिक प्रवृति के लोगों के साथ पार्टी में निष्क्रिय नेताओं को भी पैनल में शामिल करने की शिकायतें राहुल गांधी तक पहुंच गई हैं।
यह चर्चाएं रात तक चारों प्रदेश सह प्रभारी विवेक बंसल, देवेन्द्र यादव, तरूण कुमार, काजी निजामुद्दीन और स्क्रीनिंग कमेटी के दो सदस्यों शाकिर सनादी और ललितेश त्रिपाठी को सम्पूर्ण प्रक्रिया से बाहर करने के चरम पर पहुंच गईं।
नेताओं ने दावा करना शुरू कर दिया कि इन सभी को राहुल ने शिकायत मिलने के बाद प्रक्रिया से बाहर कर दिया है। प्रदेश में फोन घनघना उठे। हालांकि जब इस संबंध में पत्रिका ने पार्टी के बड़े नेताओं से बात की तो उन्होंने अफवाह बता दिया।
कहा कि पूरे राज्य में कांग्रेस के पक्ष में माहौल है। विपक्ष ने इस माहौल को बिगाडऩे के लिए यह चाल चली है। दरअसल चारों सह प्रभारियों को पार्टी ने 50-50 सीटों पर ग्राउंड सर्वे के आधार पर पैनल में नाम जुड़वाने की जिम्मेदारी दे रखी है।
अनौपचारिक बैठकों से मचा बवाल:
राहुल ने प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में मामूली बदलाव किया है। अब स्क्रीनिंग कमेटी की अधिकारिक बैठक की बजाय पैनल पर अनौपचारिक बातचीत ज्यादा हो रही है। राहुल की अध्यक्षता में सीईसी की एक मात्र बैठक हुई है।
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक अब आधिकारिक रूप से नहीं होगी। कमेटी की अध्यक्ष शैलजा अब प्रदेश प्रभारी अविनाश पाण्डे, प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट, विशेष आमंत्रित सदस्य अशोक गहलोत व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी के साथ पैनलों को अंतिम रूप देंगी।
सीईसी में लगी थी फटकार:
सूत्रों के मुताबिक हाल में राहुल ने सीईसी की बैठक ली। इसमें सूची देखी तो उन्हें महिला और युवाओं के नाम कम नजर आए। साथ ही पार्टी में निष्क्रिय और आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों के नाम भी मिल गए। इस पर राहुल ने ग्राउंड से नाम भेजने वालों को फटकार लगाई। चूंकि राहुल के पास पहले से एक ग्राउंड सर्वे मौजूद था। उसमें हर सीट के संभावित दावेदारों के नाम शामिल थे। लिहाज इस बैठक में केवल प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा हो सकी।
एआइसीसी में भी मचा था हंगामा...
दो दिन पहले एआइसीसी में टिकटों को लेकर एक प्रदेश सह प्रभारी के कमरे में लोगों ने हंगामा कर दिया। कुछ लोगों ने लेनदेन के आरोप लगा दिए। उन्हें वहां से भागना पड़ा। सीईसी की बैठक के बाद पैनल तैयार करने में गड़बडिय़ों की चर्चा तेज हो गईव कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाने लगा। आलाकमान ने स्क्रीनिंग कमेटी सदस्य और चारों प्रदेश सह प्रभारियों को चुनाव प्रक्रिया से अलग कर दिया।
Updated on:
06 Nov 2018 08:31 am
Published on:
06 Nov 2018 08:31 am
