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ईस्टर्न कैनल परियोजना का मुद्दा फिर गरमाएगी कांग्रेस, 13 जिलों में आंदोलन की तैयारी

-कांग्रेस की फीडबैक बैठकों में भी ईआरसीपी पर फोकस करने के आए सुझाव, ईआरसीपी को विधानसभा चुनाव तक जोर शोर से उठाने पर मंथन, ईआरसीपी पर बीजेपी की चुप्पी के बाद हमलावर है कांग्रेस, ईआरसीपी के तहत आने वाले 13 जिलों में विधानसभा की 80 से ज्यादा सीटें

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एससी- एसटी और ओबीसी वोटबैंक पर फोकस, कांग्रेस ने 3 को बुलाई बैठक

जयपुर। पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में सिंचाई और पीने के पानी के लिए बहुप्रतीक्षित ईस्टर्न कैनल परियोजना का मुद्दा एक बार फिर जोर-शोर से उठाने की तैयारी प्रदेश कांग्रेस में चल रही है। ईस्टर्न कैनल परियोजना(ईआरसीपी) पर केंद्र सरकार और बीजेपी को घेरने के साथ-साथ पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों के मतदाताओं को साधने के लिए प्रदेश कांग्रेस की ओर से फिर आंदोलन छेड़ने की रणनीति तैयार की जा रही है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश कांग्रेस की ओर से अगले माह 13 जिलों में धरने प्रदर्शन शुरू किया जाएंगे, जिसकी रोडमैप पार्टी में तैयार किया जा रहा है।

कांग्रेस की फीडबैक बैठकों में भी ईआरसीसी पर फोकस रखने के आए सुझाव
दरअसल कांग्रेस के संभाग स्तरीय सम्मेलनों और हाल ही में विधायकों के साथ हुए वन टू वन फीडबैक के दौरान भी अधिकांश विधायकों ने ईस्टर्न कैनल परियोजना को लेकर पार्टी नेताओं को ढिलाई नहीं बरतने की नसीहत दी थी साथ ही सुझाव भी दिए थे कि ज्यादा से ज्यादा फोकस ईस्टर्न कैनल परियोजना के मुद्दे पर रखा जाए और इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव तक जोर शोर से उठाया जाए, जिससे कि 13 जिलों के मतदाता एआरसीपी के मुद्दे पर कांग्रेस के पाले में आ सके।

बीजेपी की चुप्पी का मिल सकता है फायदा
पार्टी थिंक टैंक का भी मानना है कि ईस्टर्न कैनल परियोजना के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह सहित बीजेपी के तमाम नेताओं ने ईस्टर्न कैनल परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग पर चुप्पी साध रखी है। ऐसे में अगर इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाए और बीजेपी को घेरा जाए तो मतदाताओं साथ कांग्रेस पार्टी को मिल सकता है।

ईआरसीपी पर लंबे समय तक आंदोलन किया था कांग्रेस ने
ईआरसीपी को लेकर प्रदेश कांग्रेस की ओर से पिछले डेढ़ साल से लगातार पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों के साथ प्रदेश लेवल पर भी धरने-प्रदर्शन किए गए थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित अन्य नेताओं ने लगातार केंद्र की सरकार और बीजेपी को जमकर घेरा था। साथ ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को भी इस मामले में घेरने के काम किया था, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निशाने पर भी गजेंद्र सिंह शेखावत रहे थे।

हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी के तमाम विधायकों से अपील भी की थी कि पक्ष-विपक्ष सबको मिलकर प्रधानमंत्री के पास चलना चाहिए और ईस्टर्न कैनल परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग करनी चाहिए।


13 जिलों में 80 से ज्यादा सीटें
दरअसल पार्टी का फोकस इसलिए भी ईस्टर्न कैनल परियोजना पर ज्यादा है क्योंकि ईस्टर्न कैनल परियोजना के तहत आने वाले 13 जिले जिनमें जयपुर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा, अजमेर, बूंदी, कोटा, बारां और झालावाड़ जिले आते हैं। 13 जिलों में विधानसभा की 80 से ज्यादा सीटें आती हैं। ऐसे में ईस्टर्न कैनल परियोजना के मुद्दे को कांग्रेस थिंक टैंक भी अपने लिए किसी ट्रम्कार्ड से कम नहीं मान रहा है।

गौरतलब है कि एक ओर जहां केंद्र सरकार ने ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग की जा रही है तो वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी ईआरसीपी परियोजना के लिए 9000 करोड़ रुपए बजट में रखे जाने की बात कहते हुए दावा किया है कि अगर केंद्र सरकार इस परियोजना में सहयोग नहीं करती है तो राज्य सरकार अपने दम इस परियोजना का पूरा करेगी।

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