
जयपुर
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की (Prisoners of 60 yrs or more )जेलो में बंद 60 साल या ज्यादा उम्र के आजीवन कारावास की सजा से दंडित(LI) और 14 साल की सजा भुगत चुके सात कैदियों को परमानेंट पैरोल पर रिहा करने का प्रस्ताव राज्य स्तरीय कमेटी को भेजने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश एन.एस.ढड़्ढ़ा की बैंच ने यह अंतरिम निर्देश राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की जनहित याचिका पर दिए।
सरकार ने बताया...
राज्य कीे जेलों में कुल 231 कैदी 60 या ज्यादा उम्र के हैं। इनमंे से 29 रिहा हो चुके हैं,छह को परमानेंट पैरोल और 15 को जमानत मिल चुकी हैद्ध सात कैदियों की सजा पूरी हो चुकी है या निर्दोष साबित हो चुके हैं जबकि एक कैदी की मृत्यु हो गई है। इस प्रकार अब 202 कैदी बचे हैं और इनमें से 138 कैदी आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं और इनमें से भी 31 कैदी छूट सहित 14 साल से ज्यादा की सजा भुगत चुके हैं। जबकि सात कैदियों ने बिना किसी छूट के 14 साल से ज्यादा की सजा भुगत ली है।
अदालत के निर्देश...
अदालत ने सात कैदियों को परमानेंट पैरोल पर रिहा करने का प्रस्ताव राज्य स्तरीय कमेटी में पेश करने के निर्देश दिए हैं । 202 में से 138 कैदियों को उम्र कैद की सजा हुई है और इनमें से 64 कैदी एेसे हैं जिन्हें उम्र कैद से कम की सजा हुई है लेकिन उनकी उम्र 60 साल या ज्यादा हो चुकी है। सरकार इन कैदियों को भी उम्र के आधार पर सजा का आधा हिस्सा पूरा करने पर परमानेंट पैरोल पर रिहा करने पर विचार करे। उम्र कैद की सजा पाने वाले 24 कैदी 14 साल से ज्यादा और कुछ कैदी तो 16 या 17 साल से ज्यादा की सजा भुगत चुके हैं। एेसे कैदियों को भी परमानेंट पैरोल पर रिहा करने या ओपन जेल में भेजने पर विचार हो। महाधिवक्ता महेन्द्र सिंह सिंघवी ने अदालत को सुनवाई की अगली तारीख तक अदालती निर्देशों को पूरा करने पर सरकार के रुख बताने का आश्वासन दिया है। मामले में अब अगली सुनवाई 22 नवंबर को होगी।
यह है मामला...
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने राज्य की जेलों में बंद 65 साल की उम्र वाले कैदियों को परमानेंट पैरोल पर रिहा करने के निर्देश देने के लिए जनहित याचिका दायर की है। प्राधिकरण का कहना है कि राजस्थान के पैरोल नियमांे के अनुसार 70 फीसदी सजा पूरी होने के बाद ही कोई कैदी अपने आचरण और पूर्व में लिए गए पैरोल आदि के आधार पर परमानेंट पैरोल पर रिहा होने का अधिकारी होता है । लेकिन,जब कैदी की उम्र ज्यादा हो चुकी हो तो उनके पुन: कोई अपराध करने की संभावना नगण्य हो जाती है। सरकारी के नियमों के अनुसार भी 60 साल की उम्र वाले सीनियर सिटीजन होते हैं। इसलिए सरकार ज्यादा उम्र के इन कैदियों को परमानेंट पैरोल पर रिहा करने के लिए दयापूर्वक और संवेदनशीलता के साथ विचार करे। सुनवाई के दौरान अदालत ने 65 साल के स्थान पर 60 साल की उम्र वाले कैदियों को परमानेंट पैरोल पर विचार किया है।
Published on:
29 Oct 2019 06:27 pm
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