राज विवि में स्वतंत्रता आंदोलन में राजपूताना राज्यों की महिलाओं का विस्मृत इतिहास विषय पर हुआ सेमिनार
जयपुर।
राजस्थान विवि के इतिहास और संस्कृति विभाग की ओर से गुरुवार को स्वतंत्रता आंदोलन में राजपूताना राज्यों की महिलाओं का विस्मृत इतिहास विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोजित इस सेमिनार में राजस्थान लघु उद्योग निगम के चेयरमैन राजीव अरोड़ा थे। जिनका कहना था कि
स्वतंत्रता आंदोलन में जननायकों के साथ महिलाओं ने मां, पत्नी और बहन सहित कई रूपों में कष्ट झेल कर उनके संघर्ष को गति दी। अरोड़ा ने सरोजनी नायडू, सावित्रीबाई फुले, मैडम भीकाजी कामा आदि के योगदान का उल्लेख करते हुए भारतीय सभ्यता के इतिहास में महिलाओं के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उद्घाटन सत्र में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संगीता शर्मा ने कहा कि इतिहास लेखन में स्त्रियों के योगदान को स्थान देकर हमें उनके अदृश्य विस्मृत योगदान को समाज के सामने रखना होगा। सेमिनार की अध्यक्षता विवि के कुलपति प्रो. राजीव जैन ने की। वहीं सेमिनार में प्रतिभागी तकनीकी सत्रों मेंपत्र वाचन किए गए। डॉ. अनुराधा माथुर अलवर क्षेत्र की दलित महिलाओं और डॉ. सज्जन पोसवाल हाड़ौती क्षेत्र की महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डालेंगे। प्रो.संगीता शर्मा राजपूताना की खादी आंदोलन और प्रो.जैदी गांधी के रचनात्मक कार्यक्रमों में महिलाओं के योगदान पर चर्चा करेंगी। डॉ.राखी यादव इतिहास के पुनर्लेखन, डॉ.शरद राठौड़ महिलाओं के संस्कारण और डॉ.गीता सामौर राजस्थानी साहित्य में महिलाओं की चेतना के संदर्भ में पत्र प्रस्तुत किए। रूवा अध्यक्ष प्रो. दमयंती गुप्ता की अध्यक्षता में समापन सत्र में डॉ. हुुकुम चंद बीज वक्तव्य प्रस्तुत किया।