प्रत्याशी चयन और गठबंधन को लेकर भी प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच तालमेल का अभाव रहा। पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और हरीश चौधरी सहित कई अन्य नेता केवल अपने समर्थकों को ही टिकट दिलाने के लिए लॉबिंग करते रहे। अन्य प्रत्याशियों की जमीनी हकीकत के बारे में जानकारी नहीं ली गई कि प्रत्याशी चुनाव लड़ने के इच्छुक भी हैं या नहीं। वहीं, नागौर सीट पर गठबंधन को लेकर नेता धड़ों में बंटे रहे। जिताऊ चेहरों के तौर पर सिंगल नाम तय करके स्क्रीनिंग कमेटी को भेजे गए।