
होसपेट. आनंद दरबार के छठे दिवस आयोजित धर्मसभा में जैन संत अक्षयऋषि ने सामाजिक एकता, संगठन, सहयोग और सेवा भावना को समाज की वास्तविक शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि समाज तभी सशक्त बनता है, जब लोग व्यक्तिगत मतभेद और स्वार्थ छोडक़र सामूहिक हित के लिए एकजुट होकर कार्य करें।अक्षयऋषि ने कहा कि जिस प्रकार छोटी-छोटी जलधाराएं मिलकर विशाल नदी का रूप लेती हैं, उसी प्रकार समाज के लोगों की सामूहिक शक्ति बड़े से बड़े कार्य को संभव बना सकती है। अकेले व्यक्ति की क्षमता सीमित हो सकती है, लेकिन संगठित प्रयासों से सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि संगठन में शक्ति है, जबकि विघटन समाज को कमजोर करता है। प्रेम, सद्भाव, समभाव और परस्पर सहयोग के साथ समाजहित में योगदान देना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। युवाओं को विशेष रूप से सेवा कार्यों से जुडऩे का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि युवा ऊर्जा को सकारात्मक दिशा मिले तो संस्कार, मानवता और सामाजिक सरोकार मजबूत होंगे।
Bअन्नदान में युवाओं की सक्रिय भागीदारीB
शांतिलाल विनायकिया ने बताया कि आनंद दरबार के दौरान अन्नदान सहित विभिन्न सेवा गतिविधियों में बड़ी संख्या में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने कहा कि अन्नदान मानव सेवा और करुणा का प्रभावी माध्यम है। होसपेट के भीमसिंह राजपुरोहित ने यह जानकारी साझा की।
Updated on:
12 Aug 2026 06:00 am
Published on:
12 Aug 2026 06:00 am
