
देवेन्द्र सिंह राठौड़ / जयपुर. पूरे देश में लॉकडाउन के बाद कामकाजी गरीब तबके ने जयपुर छोड़ना शुरू कर दिया है। सिर पर गठरी रखकर बच्चों को गोद में लेकर महिलाएं और माथे और कंधे पर सामान का थैला लिए पुरुष पैदल ही जयपुर छोड रहे है। ह़र कोई यहीं चाहता है कि, कैसे भी घर पहुंच जाए।
कोरोना वायरस के खौफ के बीच अजमेर रोड, आगरा रोड, सीकर रोड हो या फिर टोंक रोड हाईवे पर इन दिनों गाड़ियों की भीड़ के बजाय सैैकड़ों पैदल लोगों को भीड़ दिख रही है। पूछने पर इनका कहना है कि जब उनके पास कोई कामकाज ही नहीं है तो यहां पर रुकने का कोई मतलब नहीं बनता। स्थिति यह भी है कि पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए कुछ लोग रेलवे पटरियों का भी सहारा ले रहे हैं।
उनका कहना है कि किसी तरह वह अपने गांव पहुंच जाएं, जिसके बाद दोबारा नए जीवन की शुरुआत का प्रयास करेंगे। अजमेर रोड हीरापुरा चौराहा पर शुक्रवार को दोपहर दो बजे सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ दिखी। ये लोग घरों तक पहुंचने के लिए किसी सवारी के इंतजार में थे। अचानर एक ट्रक रूका तो हर उसकी टूट पड़ा। जिसे जगह मिली मानो उसने खुद को खुश किस्मत मान लिया। जिन्हें ट्रक में जगह नहीं मिली, उन्होंने पैदल ही हापुड़ की ओर कदम बढ़ा दिए। कई किलोमीटर तक हाइवे पर केवल लोगों की ही भीड़ देखने को मिल रही है।
इन लोगों का कहना है कि पुलिस का पहरा लगातार है। इसलिए दिकक्त हो रही है। बार बार पूछताछ से परेशान हो रहे है। हालांकि ज्यादातर लोग रात में निकल रहे है, क्योंकि उस वक्त पहरा कम रहता है। इनमें से ज्यादातर लोग पूर्वांचल से सटे जिलों के हैं। इनमें से काफी लोगों को यह भी नहीं पता कि उन्हें अभी कितने किलोमीटर लंबा चलना है। उनके साथ पूरे जीवन की भी पूंजी है, जिसे वे गठरी में बांधे हुए हैं।
कार वाले वसूल रहे मनमाना किराया
पैदल ही घर के लिए निकले राहगीरों को बिठाने के लिए कुछ कार चालक मनमाना किराया वसूूल रहे हैं। कई बार तो ये उनसे मोटी रकम लेकर घरों तक पहुंचाने का भी सौदा कर रहे हैं।
रोजगार बचा न घर
पांच्यावाला से मध्यप्रदेश के मुरैना के लिए परिवार के साथ पैदल निकले रवि प्रजापति ने बताया कि यहां दैनिक मजदूरी करता था। अब कोरोना के कारण रोजगार भी गया और मकान मे भी नहीं रख रहे मकान मालिक। मुंह मांगा किराया मांग रहे है, ऐसे में घर लौटना ही ठीक समझा। सरकार को सोचना चाहिए।
प्रवासी मजदूरों पर भारी संकट
बिहार के बेगूसराय से पांच माह पहले जयपुर आए बंटी ने बताया कि वह स्नातक की पढ़ाई कर रहा था लेकिन घर की खराब माली हालत के कारण वह काम करने यहां आया और यहां राज मिस्त्री का काम सीख रहा था। कोरोना के कारण काम पिछले सप्ताह ही बंद हो गया था और अब न काम मिल रहा है और न वापस जा पा रहे हैं। यहीं स्थिति रंगाई पुताई का ठेका लेने वाले किशन मिश्रा की है। उसने अपने साथ काम करने वाले पांच मजदूरों को घर जाने के लिए कह दिया है।
Published on:
27 Mar 2020 09:43 pm
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