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Rajasthan News : राजस्थान में यहां 10-20 नहीं, पूरे 800 करोड़ से तैयार हो रही एक ‘स्पेशल बिल्डिंग’  

देश का ये सबसे 'बेशकीमती टावर' इसी साल के आखिर तक बनकर तैयार होने जा रहा है। इसमें पूरे 800 करोड़ से भी ज़्यादा की लागत आने का अनुमान है।

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IPD Tower Jaipur

राजस्थान में एक ऐसा टावर (इमारत/बिल्डिंग) बनकर तैयार हो रही है जिसमें कोई 10 या 20 करोड़ नहीं, बल्कि पूरे 800 करोड़ से भी ज़्यादा की लागत आने का अनुमान है। प्रदेश का ये सबसे 'बेशकीमती टावर' इसी साल के आखिर तक में बनकर तैयार होने जा रहा है।

पूर्व सरकार का है ड्रीम प्रोजेक्ट

बात जयपुर में बनकर तैयार हो रहे आइपीडी टावर की हो रही है। पूर्ववर्ती सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का काम फिलहाल धीमी गति से चलने के कारण एक बार फिर चर्चा में है। एक अनुमान के मुताबिक़ आइपीडी टावर में अब करीब 100 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। 

जानकारी के अनुसार 100 करोड़ रुपए इस अतिरिक्त राशि को लेकर मेडिकल कॉलेज ने भी सैद्धांतिक स्वीकृति भी दे दी है। इस लिहाज से ये प्रोजेक्ट 800 करोड़ रुपए के पास पहुंच जाएगा।

कछुआ चाल से चल रहा काम

आइपीडी टावर के प्रोजेक्ट को नवम्बर, 2024 तक पूरा किया जाना है। लेकिन जिस गति से काम चल रहा है, उसे देखकर नहीं लगता है कि यह समय पर पूरा हो पाएगा।

ढिलाई के पीछे एक वजह ये भी

दरअसल, इस प्रोजेक्ट के लिए मेडिकल कॉलेज को 95 करोड़ रुपए देने हैं, लेकिन अब तक 45 करोड़ रुपए ही दे पाया है। बाकी राशि के लिए जेडीए और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के बीच पिछले आठ माह से पत्राचार चल रहा है। यही स्थिति राजस्थान आवासन मंडल की भी है। मंडल को 200 करोड़ रुपए देने हैं लेकिन अब तक 173 करोड़ रुपए दिए जाने बाकी हैं।

मंजिलों पर सस्पेंस

टावर 25 मंजिला होगा या फिर 17 मंजिल का, इस पर अब तक कोई निर्णय सरकारी स्तर पर नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि आचार संहिता के बाद सरकार ही इस पर कोई फैसला लेगी। पैसा अटकने की वजह से 17 मंजिल पर ही काम रोक दिया गया है। 

हालांकि, मेडिकल कॉलेज की ओर से सुविधाओं की बात कहकर प्रोजेक्ट को मूल स्वरूप में बनाए जाने की बात कही जा रही है। लेकिन 31 जनवरी को मुख्य सचिव सुधांश पंत की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसमें 17 मंजिल तक ही टावर बनाने की सैद्धांतिक सहमति बन गई थी। तर्क था कि पार्किंग में दिक्कत होगी और प्रवेश द्वार पर कम चौड़ी सड़क है। इससे आवाजाही प्रभावित रहेगी।

456 करोड़ में होनी थी तैयार

शिलान्यास के समय प्रोजेक्ट की लागत 456 करोड़ रुपए बताई थी। शिलान्यास के बाद प्रोजेक्ट की डिजाइन में कई बदलाव किए गए। तीन सर्विस फ्लोर को डिजाइन में जोड़ दिया गया। इसके लिए पिछली सरकार ने मूल लागत तौर पर 60 करोड़ रुपए अतिरिक्त स्वीकृत किए।

राशि को लेकर दिक्कत हुई तो जेडीए ने प्रोजेक्ट पर फैसला करने के लिए एम्पावर्ड कमेटी की बैठक बुलाने के लिए सरकार को पत्र भी भेजा। माना जा रहा है कि आचार संहिता हटने के बाद ही फैसला हो पाएगा।

जानें ख़ास बातें--

मरीजों के लिए 1243 बेड होंगे

20 ऑपरेशन थिएटर, 4 कैथ लैब, 100 ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर

आपात स्थिति के लिए टावर के छत पर हेलीपैड, एयर एम्बुलेंस

एसआइसीयू, एमआइसीयू, एचडीयू

820 वार्ड बेड, 100 डीलक्स कमरे, 80 प्रीमियम कमरे

200 आइसीयू

आवासन मंडल और मेडिकल कॉलेज पर पूरा पैसा नहीं मिला है। मेडिकल कॉलेज ने कुछ संशोधन के लिए भी कहा है। इस पर अतिरिक्त 100 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

-देवेंद्र गुप्ता, निदेशक, अभियांत्रिकी शाखा, जेडीए

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