
प्रौद्योगिकी संवर्धन के मामले में आईआईटी का कोई मुकाबला नहीं हैं। फिर चाहे वह बात राष्ट्रीय स्तर की हो या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर की। जोधपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी)को बड़ी सफलता हाथ लगी है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने मेटल 3-डी प्रिंटर बना लिया है। लेजर और रोबोट सिस्टम को छोड़कर इसके सभी कलपुर्जे देश में ही डिजाइन व निर्मित किए गए हैं।
भारत में बना यह पहला 3-डी प्रिंटर है। इससे एयरोस्पेस, डिफेंस, रेलवे, ऑयल एण्ड गैस सहित सामान्य इंजीनियरिंग में मशीनरी तैयारी करने में काफी मदद मिलेगी। इस प्रिंटर की मदद से यात्री जहाज के साथ लड़ाकू विमानों के पार्ट भी जरूरत के अनुसार बनाए जा सकेंगे। अब तक 3-डी प्रिंटर को आयात करना पड़ता था, जिसकी कीमत 7.50 से 10 करोड़ रुपए आती थी।
आइआइटी के 3-डी प्रिंटर की कीमत 3.50 से 5 करोड़ रुपए है। यह डायरेक्ट एनर्जी डिपोजिशन (डीईडी) तकनीक पर काम करता है। इसे आइआइटी जोधपुर के धातुकर्म व सामग्री इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. रवि, डॉ. अबीर भट्टाचार्य, भौतिकी के डॉ. वी. नारायणन, कम्प्यूटर साइंस के डॉ. सुमित कालरा, मैकेनिकल के डॉ. राहुल छिब्बर और डॉ. हार्दिक कोठाड़िया ने मिलकर तैयार किया है।
क्या है मेटल
पॉलिमर 3-डी प्रिंटिंग की लॉन्चिंग के कुछ साल बाद मेटल 3-डी प्रिंटिंग तकनीक शुरू हुई। मेटल 3-डी प्रिंटर का प्रयोग इंजीनियरिंग में होता है। प्रिंटर में विभिन्न धातुओं के पाउडर डालकर उसे निश्चित अनुपात में मिलाकर प्रिंट कर देने से कलपुर्जे बन जाते हैं। जैसे तांबा, कांसा व टिन से नट-बोल्ट बनाए जा सकते हैं। इसकी सटीकता व शार्पनेस मिलीमीटर में होती है, इसलिए इसका विशेष महत्व है।
Published on:
21 Jun 2022 04:44 pm
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