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Vaccination: टीकाकरण में रचा नया इतिहास, तीन दशक में 21 से 91.8 प्रतिशत तक पहुंचा टीकाकरण कवरेज

healthcare development: वर्ष 1992-93 में जहां प्रदेश में पूर्ण टीकाकरण का प्रतिशत केवल 21.1 था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर लगभग 91.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, प्रभावी प्रबंधन और समाज में बढ़ती जागरूकता का परिणाम मानी जा रही है।

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जयपुर

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Rajesh Dixit

Mar 16, 2026

National Immunization Day: जयपुर. राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर राजस्थान ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों से देशभर में एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया है। कभी बीमारू राज्य की श्रेणी में गिने जाने वाले राजस्थान ने पिछले तीन दशकों में टीकाकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हासिल की है। वर्ष 1992-93 में जहां प्रदेश में पूर्ण टीकाकरण का प्रतिशत केवल 21.1 था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर लगभग 91.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, प्रभावी प्रबंधन और समाज में बढ़ती जागरूकता का परिणाम मानी जा रही है।

राजस्थान में पूर्ण टीकाकरण का बढ़ता प्रतिशत

वर्षपूर्ण टीकाकरण प्रतिशत
1992-9321.1 प्रतिशत
2021-2283.3 प्रतिशत
2022-2385.2 प्रतिशत
2023-2488.2 प्रतिशत
2024-2591.8 प्रतिशत

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिल रही है। जन्म से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को विभिन्न टीकों के माध्यम से सुरक्षित रखा जा रहा है। टीकाकरण के मजबूत तंत्र के कारण प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है और कई संकेतकों में राज्य राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में पहुंचा है।

पूर्ण टीकाकरण कवरेज में लगभग 7 से 8 प्रतिशत की वृद्धि

पिछले पांच वर्षों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज में लगभग 7 से 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें नियमित टीकाकरण सत्रों, आंगनबाड़ी केंद्रों की सक्रिय भूमिका और समुदाय की बढ़ती भागीदारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में टीडी टीकाकरण की उपलब्धि लगभग 89 प्रतिशत, बीसीजी 86 प्रतिशत, ओपीवी-3 लगभग 88.8 प्रतिशत, पेंटावेलेंट-3 करीब 91.9 प्रतिशत और खसरा-रूबेला लगभग 90.6 प्रतिशत रही है।

टीकाकरण से बच्चों को मिलने वाली सुरक्षा

टीकासुरक्षा
बीसीजीटीबी से बचाव
हेपेटाइटिस-बीलीवर संक्रमण से सुरक्षा
पेंटावेलेंटपांच गंभीर बीमारियों से बचाव
पोलियोलकवा रोग से सुरक्षा
रोटा वायरसडायरिया से बचाव
पीसीवीनिमोनिया से सुरक्षा
खसरा-रूबेलासंक्रामक रोगों से बचाव
आईपीवी, डीपीटी बूस्टर और टीडीअतिरिक्त सुरक्षा टीके

समय—समय पर नई वैक्सीन भी शामिल

टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूत बनाने के लिए समय-समय पर नई वैक्सीन भी शामिल की गई हैं। वर्ष 2014 में पेंटावेलेंट वैक्सीन, 2016 में आईपीवी, 2017 में रोटा वायरस और 2018 से पीसीवी वैक्सीन को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में जोड़ा गया। इन वैक्सीन से बच्चों को निमोनिया, डायरिया और अन्य गंभीर संक्रमणों से सुरक्षा मिल रही है।

वर्ष 2009 के बाद पोलियो का कोई मामला सामने नहीं

राजस्थान में वर्ष 2009 के बाद पोलियो का कोई मामला सामने नहीं आया है और वर्ष 2014 में भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद बच्चों की सुरक्षा के लिए पल्स पोलियो अभियान नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।

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