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कोर्ट को ऐसे फैसले नहीं देने चाहिए जो लागू न हो सकें : अमित शाह
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कोर्ट को ऐसे फैसले नहीं देने चाहिए जो लागू न हो सकें : अमित शाह

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कोर्ट को ऐसे फैसले नहीं देने चाहिए जो लागू न हो सकें : अमित शाह

-सबरीमला विवाद :

कन्नूर। भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने सबरीमला में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के लिए इजाजत देने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कन्नूर में एक मंच से सार्वजनिक रूप से आलोचना की। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर बरसते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि वह सबरीमाला मुद्दे के साथ खिलवाड़ न करें। विजयन आस्था के मुद्दे को छेडऩे की कोशिश करेंगे, तो फि र भाजपा केरल सरकार को उखाड़ फेंकने में संकोच नहीं करेगी। इतना ही नहीं शाह ने ये भी कहा कि अदालत को ऐसे फैसले नहीं देने चाहिए, जो लोगों की धार्मिक आस्था के खिलाफ हों और जिन्हें लागू न किया जा सके।

-सुप्रीम कोर्ट, संविधान पर हमला : विजयन

उधर, केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने तिरुवनंतपुरम में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट, संविधान और देश की न्यायिक प्रणाली पर हमला है। शाह का कहना है कि कोर्ट को केवल वही आदेश देना चाहिए जो लागू हो सके। इससे लगता है कि संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों को लागू नहीं किया जाना चहिए।

-कोर्ट के इन फैसलों का भी जिक्र

इससे पूर्व, कन्नूर की एक जनसभा में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों जैसे जल्लीकट्टू, मस्जिदों में लाउडस्पीकरों पर प्रतिबंध और दही-हांडी में दखलंदाजी आदि का जिक्र करते हुए कहा कि इन फैसलों को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के बहाने राज्य की वामपंथी सरकार हिंदुत्व के कार्यकर्ताओं पर जुल्म ढा रही है और इस आंदोलन को बलपूर्वक दबाना चाहती है।

-सुप्रीम कोर्ट को लेना चाहिए संज्ञान : मायावती


सबरीमाला मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ओर से की गई टिप्पणी की बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अदालत को इसका संज्ञान जरूर लेना चाहिए। मायावती ने जारी बयान में कहा कि शाह का केरल के कन्नूर में सुप्रीम कोर्ट को हिदायत देते हुए यह कहना अति-निन्दनीय है कि अदालत को ऐसे फैसले नहीं देने चाहिए, जिनका अनुपालन नहीं किया जा सके और न्यायालय को आस्था से जुड़े मामले में फैसला देने से बचना चाहिए। न्यायालय को इसका संज्ञान अवश्य लेना चाहिए।