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गौ सेवा, उत्तम सेवा-स्वामी प्रियम

गौ माता सनातन संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण अंग है। गौ माता शुभता है। गौ माता दिव्यता है। गौ ही एक ऐसी माता है जिसमें सभी 33 प्रकार के देवी देवता का निवास है। ऐसे में गौ माता की सेवा मात्र से ही जन्म जन्म के चक्र से प्राणि मुक्त हो जाता है।

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गौ माता सनातन संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण अंग है। गौ माता शुभता है। गौ माता दिव्यता है। गौ ही एक ऐसी माता है जिसमें सभी 33 प्रकार के देवी देवता का निवास है। ऐसे में गौ माता की सेवा मात्र से ही जन्म जन्म के चक्र से प्राणि मुक्त हो जाता है। यह बात स्वामी प्रियम ने कही। उन्होंने कहा कि गौ माता की सेवा को समाज में बढ़ावा देना है। यह सेवा किसी भी प्राणी में स्नेह और श्रद्धा को पैदा करती है। ऐसे में वह स्वयं सेवा करने का मौका कभी नहीं चुकते हैं। गौ माता की सेवा के लिए हमेशा ही तत्पर रहते हैं। सेवा के लिए वह अक्सर कई दिन गौशाला में बिताते हैं।

स्वामी प्रियम बताते हैं कि गौसेवा का मानसिकता पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। गौ इस पृथ्वी पर सबसे बेहतर प्राणी है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि किसी बालक को माता के बाद दुग्धपान कराने के लिए गौमाता का दूग्ध सबसे उत्तम माना जाता है। गौ से निकले दुग्ध का हर उत्पाद न केवल मनुष्य के शरीर को सौष्ठव प्रदान करता है बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है।

स्वामी प्रियम बताते हैं सावन का माह चल रहा है। भगवान शिव के साथ गाय का एक विशेष स्थान है। भगवान शिव का घोड़ा नंदी एक बैल है। इंद्र के पास कामधेनु यानी इच्छापूर्ति करने वाली गाय है। कृष्ण का पूरा चरित ही इन गायों के बीच गुजरता है। ऐसे में हिंदू धर्म में गाय को गौमाता कहा जाता है। एक बहुत ही पावन स्थान है। स्वामी प्रियम सभी अनुयायियों से गौ सेवा करने का आहावान करते हैं। वह कहते हैं कि गौसेवा पुण्य अर्जित करने का यह सबसे अच्छा तरीका है।