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16000 अपहरण, 12000 बलात्कार और 3400 मर्डर….. ये है राजस्थान पुलिस का रिपोर्ट कार्ड

पिछला लगभग पूरा साल कोरोना के कारण अस्सी फीसदी से ज्यादा लोग घरों से ही काम पर रहे, लेकिन उसके बाद भी पिछले साल भी अपराध के आंकड़े रिकॉर्ड तोड़ गए।

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Crime: आभूषण व नकदी ले उड़े चोर, मामला दर्ज

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जयपुर
एक लाख की राजस्थान पुलिस बेड़े और सात करोड़ से भी ज्यादा राजस्थान की जनता को नए पुलिस मुखिया मिल गए हैं। राजस्थान पुलिस को दो दिन पहले ही 35वें डीजीपी के रुप में सीनियर आईपीएस अफसर उमेश मिश्रा मिले हैं। मिश्रा ने नियुक्ति के दिन ही अपनी वर्किंग स्टाइल भी दिखा दी। चार बजे उन्हें डीजीपी की कुर्सी मिली और कुछ घंटे में ही उन्होनंे सीनियर आईपीएस अफसरों की मीटिंग कॉल कर अपने इरादे साफ दर्शा दिए। उम्मीद है कि अब राजस्थान के अपराध की तस्वीर भी बदलेगी और अपराध पुलिस के काबू में रहेगा। लेकिन इससे पहले आपको बताते हैं राजस्थान पुलिस का रिपोर्ट कार्ड कि दो दिन पहले रिटायर हुए डीजीपी एमएल लाठर के कार्यकाल में अपराध के क्या रिकॉर्ड रहे...., किस तरह से बेकाबू होता चला गया अपराध। लाठर साल 2020 नवम्बर से इस साल नवम्बर की शुरुआत तक रहे।

16000 से ज्यादा अपहरण, बारह हजार से ज्यादा बलात्कार और मर्डर 3400 से ज्यादा मर्डर
साल 2020 में नवम्बर महीने से लेकर इस साल सितंबर महीने तक राजस्थान में 4 लाख 32 हजार 562 अपराध अलग अलग आईपीसी सेक्शन में पुलिस थानों में दर्ज हुए हैं। इन अपराध में अपहरण, रेप, मर्डर और चोरी के मामलों की संख्या पिछले सालों की तुलना में कहीं ज्यादा है। इन 23 महीनों के दौरान राजस्थान 3462 मर्डर, हत्या के प्रयास के 4406, डकैती 161, लूट 2925, अपहरण 16105, बलात्कार 12757, बलवा यानि दंगे 454, नकबजनी 13961, चोरी 61681 और अन्य अपराध के 3 लाख सात हजार 518 केस दर्ज हुए हैं। सभी तरह के अपराध में इस साल बढ़ोतरी हुई है। पिछला लगभग पूरा साल कोरोना के कारण अस्सी फीसदी से ज्यादा लोग घरों से ही काम पर रहे, लेकिन उसके बाद भी पिछले साल भी अपराध के आंकड़े रिकॉर्ड तोड़ गए।

कानून के दृष्टिकोण से ये साल सबसे खराब, इंटेलीजेंस रही पूरी तरह से फेल
कानून बंदोबस्त के हिसाब से राजस्थान का ये साल सबसे खराब रहा। इस साल उदयपुर में जो तालिबानी हत्याकांड हुआ उसने राजस्थान को पूरे देश में बदनाम कर दिया। इस तरह का अपराध अन्य किसी राज्य में सामने नहीं आया। इसके अलावा इस साल करौली, धौलपुर, भरतपुर, जयपुर, जोधपुर, अजमेर, भीलवाड़ा में कम्युनल असॉल्ट और दंगों के मामले सामने आने के कारण इस साल अलग अलग शहरों में करीब चालीस दिन से भी ज्यादा इंटरनेट बंद करना पडा। यह संखया अब तक किसी भी साल में नेट बंदी की संख्या से सबसे ज्यादा है। माफिया अपराध के चलते इस साल पुलिसवालों पर तीस से भी ज्यादा हमले हुए हैं और उसमें एक पुलिसवाले की तो हत्या तक कर दी गई है। जयपुर के अलावा कोटा, भरतपुर, धौलपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर , भीलवाड़ा जिले कानून बंदोबस्त के हिसाब से लॉस्ट स्टेज पर रहे हैं। स्नेचिंग के अपराध कोरोना अनलॉक होने के बाद सबसे ज्यादा सामने आए हैं। मोबाइल, पर्स और चेन स्नेचिंग के इस साल करीब तीन हजार से भी ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। मोबाइल स्नेचिंग और चेन तोड़ने की घटनाओं में तो इस साल पहली दफा दो महिलाओं की जान तक जा चुकी है।

कानून बंदोबस्त कायम करना, साइबर अपराध और माफिया राज को काबू करना हमारी सबसे बड़ी चुनौती है और इसी पर काम करने की सबसे ज्यादा जरुरत हैं। इसी लाइन में पुलिस और ज्यादा मजबूती से काम करेगी।
उमेश मिश्रा, डीजीपी
राजस्थान पुलिस