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अपराध किया तो सब जान जाएंगे

पुलिस महानिदेशक लाठर ने राजस्थान पत्रिका को बताया

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Rajasthan police

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जयपुर। उत्तरप्रदेश में अपराधियों का रेकॉर्ड वेबसाइट या अन्य माध्यम से सार्वजनिक करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के सवाल से राजस्थान में भी बदलाव आने के संकेत हैं। पुलिस महानिदेशक महानिदेशक मोहनलाल लाठर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश देखने के बाद कार्ययोजना पर विचार करने को कहा है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तरप्रदेश के पुलिस महानिदेशक से सवाल किया है कि अपराधियों का रेकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता, यह पासवर्ड संरक्षित क्यों है? इस मुद्दे को लेकर राजस्थान पत्रिका की पड़ताल में सामने आया है कि राजस्थान में भी अपराधियों के रेकॉर्ड को सार्वजनिक नहीं किया जाता, जिससे आमजन और अदालतों में सरकार की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं और महाधिवक्ता तक को अपराधियों के रेकॉर्ड की जानकारी नहीं मिल पाती। दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी राजकीय अधिवक्ता को सुनवाई के दौरान एक अपराधी के अपराधिक रेकॉर्ड की जानकारी नहीं होने को लेकर यह विषय उठा।
केन्द्र सरकार के सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) प्रोजेक्ट के तहत अपराधियों के रेकॉर्ड को अनुसंधान एजेंसी, न्यायालय और जेल प्रशासन के बीच तो साझा किया जाता है, लेकिन पासवर्ड संरक्षित होने से अन्य कोई इसे नहीं देख सकता। लगभग सभी प्रदेशों में यही व्यवस्था है। प्रदेश में पुलिस के उच्चाधिकारियों से इस व्यवस्था को बदल कर अपराधियों का रेकॉर्ड सार्वजनिक करने के बारे में बातचीत की गई, तो उन्होंने व्यवस्था पर पुनर्विचार की इच्छा जाहिर की परन्तु यह सब इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अध्ययन के बाद ही किया जाएगा।
यह बोले पुलिस के मुखिया लाठर...
पुलिस महानिदेशक (राजस्थान) मोहनलाल लाठर से बातचीत
सवाल—अपराधियों का रेकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
जवाब— अभी राजस्थान में अपराधियों की जानकारी सार्वजनिक करने की कोई व्यवस्था नहीं है। उत्तर प्रदेश स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपराधियों के संबंध में किस तरह की सूचना सार्वजनिक करने के आदेश दिए हैं। उस आदेश का रिव्यू किया जाएगा।
सवाल—क्या इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर यह कुछ बदलाव लाएंगे?
जवाब—न्यायालय के आदेश को रिव्यू करने के बाद तय किया जाएगा कि राजस्थान में क्या किया जा सकता है? इसकी कार्ययोजना किस तरह बनाई जा सकती है। कानूनन कई अपराधियों की हिस्ट्री सार्वजनिक भी नहीं की जा सकती। आदेश देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।


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