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विदेश में अटकी शिक्षा, 500 छात्रों को स्कॉलरशिप का भरोसा दे सरकार मौन, अब नसीहत देने पर उतरे

विदेश के 150 नामी संस्थानों में उच्चशिक्षा दिलाने वाली कांग्रेस सरकार की योजना को भाजपा सरकार ने फिलहाल अटका दी है। उच्च शिक्षा विभाग ने राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस योजना के तहत 500 सीटों पर आवेदन तो ले लिए, लेकिन सभी सीटों पर चयन नहीं किया है।

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जयपुर। विदेश के 150 नामी संस्थानों में उच्चशिक्षा दिलाने वाली कांग्रेस सरकार की योजना को भाजपा सरकार ने फिलहाल अटका दी है। उच्च शिक्षा विभाग ने राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस योजना के तहत 500 सीटों पर आवेदन तो ले लिए, लेकिन सभी सीटों पर चयन नहीं किया है।

विभाग ने 346 सीटों पर छात्रों का चयन कर सूची जारी कर चुका है, लेकिन 15 दिसंबर तक आ जाने वाली तीसरी सूची को आज तक जारी नहीं किया गया। इसका खमियाजा सैकड़ों छात्रों को उठाना पड़ रहा है। आलम यह है कि छात्रों ने योजना का लाभ देखकर प्रवेश तो ले लिया है, लेकिन स्कॉलरशिप लेटर नहीं मिलने के कारण उनकी पढ़ाई पर संकट आ गया है। छात्रों को विभाग के अफसर नसीहत दे रहे हैैं कि वे प्लान बी तैयार रखें। छात्रों का कहना है कि 30 जनवरी तक स्कॉलरशिप लेटर नहीं मिला तो यूनिवर्सिटी प्रवेश निरस्त कर देगी।

जिम्मेदार मौन

इस मामले में विभाग के सचिव भवानी सिंह देथा ने व्यस्त होने हवाला देकर बात करने से इनकार कर दिया। कॉलेज आयुक्त पुखराज सेन ने बात ही नहीं की। वहीं, संयुक्त निदेशक सीमा कश्यप ने बताया कि हमारी बच्चों से बात हो गई है, जैसे ही उच्च अधिकारियों से निर्देश मिलेंगे काम शुरू हो जाएगा।


जो छात्र विदेश गए, उनका भी अटक रहा बजट
योजना के तहत 346 छात्रों का चयन किया गया है, उनमें से अधिकतर विदेश जा चुके हैं। जो छात्र विदेश जा चुके हैं, उनकी स्कॉलरशिप समय पर नहीं पहुंच पा रही है। सरकार ने 10 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। लेकिन यह राशि बहुत कम है। सवाल यह है कि सरकार शेष छात्रों की स्कॉलरशिप के लिए बजट का इंतजाम कैसे करेगी।

क्या है राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस योजना(RGS)?

राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस योजना(RGS) की स्थापना उन छात्रों को छात्रवृत्ति राशि प्रदान करने के प्राथमिक लक्ष्य के साथ की गई थी जो विदेशी विश्वविद्यालयों में यूजी, पीजी या पीएचडी की डिग्री हासिल करना चाहते हैं। स्कॉलशिप में छात्र चयन प्रक्रिया के लिए 200 स्थान स्थापित किए गए। चयनित होने वाले छात्र व छात्राएं अमेरिका, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, सिंगापुर और अन्य देशों के कॉलेजों में अपनी पढ़ाई कर सकते थे। छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति राशि से उनकी ट्यूशन फीस, रखरखाव शुल्क, आपातकालीन निधि, वीजा शुल्क और अन्य खर्चों का भुगतान किया जाता है।