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दाल बाटी खाएं तो रखें यह विशेष ध्यान

Dal-Bati and Churma: Royal Thali of Rajasthan दाल बाटी राजस्थान की Royal Thali में से एक माना जाता है। वैसे तो Rainy Season में Kachhi Rasoi के नाम से यह Famous है लेकिन Ganesh Chaturthi festival के अवसर पर घर-घर में Dal-Bati and Churma बनाया जाता है। मान्यता है कि Ganesh ji भगवान को मोदक बहुत पसंद है इसलिए उन्हें Dal-Bati के साथ मोदक यानि लड्डू बनाकर भोग लगाया जाता है।

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ganesh ji

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जयपुर . दाल बाटी ( Dal-Bati ) राजस्थान की शाही थाली ( Royal Thali ) में से एक माना जाता है। वैसे तो बरसात के मौसम ( Rainy Season ) में कच्ची रसोई ( Kachhi Rasoi ) के नाम से यह मशहूर ( Famous ) है लेकिन गणेश चतुर्थी के त्योहार ( Ganesh Chaturthi festival ) के अवसर पर घर-घर में दाल-बाटी और चूरमा ( Dal-Bati and Churma ) बनाया जाता है। मान्यता है कि गणेश जी ( Ganesh ji ) भगवान को मोदक बहुत पसंद है इसलिए उन्हें दाल-बाटी के साथ मोदक यानि लड्डू बनाकर भोग लगाया जाता है।

बात दाल-बाटी और चूरमे की चल रही है तो यह भी जानना जरूरी है कि यह भोजन आम दिनों की तुलन में किए जाने वाले भोजन से काफी भारी पड़ता है। इसका मुख्य कारण बाटी में भरपूर मात्रा में घी तथा चूरमे में घी के साथ मावा, काजू, पिस्ता व बादाम का होना है। रात में यह खाना ज्यादा मात्रा में नहीं खाना चाहिए, लेकिन अक्सर देखने में आया है कि ज्यादा मात्रा में खाने के चलते कई बार रात के समय लोगों को उल्टी और गैस की तकलीफ हो जाती है। विशेषज्ञ भी यही सलाह देते हैं कि रात्रि के समय जितना हो सके हल्का खाना ही खाना चाहिए।


दिन में दाल-बाटी, चूरमा खाने से ज्यादा तकलीफ नहीं होती है। लेकिन स्वाद-स्वाद में थोड़ा भी ज्यादा खा लिया तो आलस आने लगेगा। किसी काम में मन नहीं लगेगा और नींद आने लगेगी। दाल-बाटी, चूरमा खाने के बाद प्यास बहुत लगती है। हर थोड़ी देर में पानी नहीं मिला तो बैचेनी सी होने लगती है। इसीलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दाल-बाटी के भोजन के साथ नींबू का भी प्रयोग करें।


दाल-बाटी और चूरमा एेसा भोजन है जो कभी-कभी ही खाया जा सकता है। खाने में रोज दाल-बाटी व चूनमा खाना काफी भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञ भी इसकी सलाह नहीं देते हैं। रोज खाए जाने वाले खाने की तुलना में दाल-बाटी व चूरमा में केलोरी की मात्रा दुगने से भी काफी ज्यादा होती है। यही कारण है कि इस पकवान को एक पारंपरिक त्योहार और मौसम के साथ जोड़ा गया है। कई बार लोग दाल-बाटी व चूरमा खाने के बाद डायजीन व अन्य दवाओं का उपयोग भी करते हैं... हालांकि डॉक्टरों ने इसे गलत बताया है।