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मिलिए अंजीर की खेती की ‘मास्टरनी’ मीरा मीणा से, इस तकनीक से कम लागत से मिल रही अच्छी आय

Anjeer Fig Farming: अध्यापक दंपति ने खेत में जलस्तर नीचे जाने और पानी खारा होने के कारण यह नवाचार किया है। अंजीर पेड़ से आठ माह बाद फल आने लगे।

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Dausa teacher couple anjeer Fig Farming in khanwas

लक्ष्मणसिंह गहलोत@लवाण

दौसा जिले के ग्राम पंचायत खानवास की ढाणी गांवली में अंजीर की खेती हो रही है। पेशे से अध्यापिका मीरा मीणा ने अंजीर की खेती वर्ष 2018 में पचास पौधों से की थी। पति कमलेश मीणा भी अध्यापक है, उनका भी साथ मिला और अच्छी फसल हुई। इससे उन्होंने बड़े स्तर पर खेती करना तय किया। इसके लिए नागपुर से दो हजार पौधे मंगवाए। मीरा ने बताया कि इन पौधों की कीमत करीब पांच लाख रुपए थी। अंजीर के बीज ऑनलाइन मंगवाए। मीरा के अनुसार अंजीर के एक पेड़ पर 15 किलो अंजीर का उत्पादन हुआ है।

अध्यापक दंपति ने खेत में जलस्तर नीचे जाने और पानी खारा होने के कारण यह नवाचार किया है। मीरा ने बताया कि इस खेती से कम लागत से अच्छी आय मिल रही है। अध्यापन और घर की जिम्मेदारियों के बीच दोनों समय एक-एक घंटे खेती को संभालती हैं। अंजीर पेड़ से आठ माह बाद फल आने लगे। उन्होंने ड्राईफ्रूट बनाकर बेचने पर ध्यान दिया, जिसका मूल्य बारह सौ रूपए प्रति किलो तक मिला। मीरा ने बताया कि डायना किस्म के अंजीर उत्तम क्ववालिटी के हैं। विदेशों में इनकी काफी मांग है। बीज देने वाली कंपनी ही फल खरीद रही है।

स्वास्थ्यवर्धक फल
अंजीर स्वास्थवर्धक और स्वादिष्ट फल है, जिसके फलों का सेवन ताजा और सुखाकर किया जाता है। इसमें विटामिन ए, बी, सी, फाइबर, कैल्शियम पाये जाते हैं। इसके सेवन से स्तन कैंसर, जुकाम, दमा, मधुमेह, अपचन जैसे रोगों में फायदा होता है।

अंजीर की खेती
अंजीर की फसल करने में दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसकी खेती में अच्छी जल निकासी वाली जगह होनी चाहिए। फसल के लिए शुष्क और कम आर्द्र जलवायु को उपयुक्त माना जाता है। इसका पूर्ण विकसित पौधा 50 से 60 वर्षो तक अच्छी पैदावार देता है। इसलिए इसके पौधरोपण से पहले खेत को अच्छी तरह से तैयार कर लेना चाहिए। गड्ढे में पौधों को लगाने से पहले उन्हें गोमूत्र से उपचारित कर लेना चाहिए। जुलाई और अगस्त में पौधरोपण उपयुक्त माना जाता है। एक हेक्टेयर के खेत में तकरीबन 250 अंजीर के पौधों को लगाया जा सकता है।

तुड़ाई में सावधानी बरतें
गर्मी के मौसम में अंजीर के पौधों को अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है। सर्दी में 15 से 20 दिन के अंतराल में सिंचाई करें और बारिश के मौसम में आवश्यकता पड़ने पर ही सिंचाई करनी चाहिए। खरपतवार नियंत्रण का ध्यान जरूर रखें। अंजीर के पौधों में न के बराबर ही रोग देखने को मिलते हैं। फलों की तुड़ाई दस्ताने पहनकर करना चाहिए, क्योंकि इसके पौधे से निकलने वाला रस त्वचा के लिए नुकसानदायक है। अंजीर के एक पौधे से लगभग 20 किलो फल प्राप्त हो जाते हैं।

पौधों को बचाने के लिए देसी जुगाड़
छोटे पौधों को प्लास्टिक की बोतल से ढकते हैं। बोतल के उपर छेद किया जाता है, जिससे पौधे की श्वसन क्रिया बनी रहती है। तापमान के मद्देनजर हरा नेट लगाते हैं। गर्मी में तापमान कम करने के लिए नेट पर भी पानी डालते हैं। सिंचाई के लिए बूंद-बूंद सिंचाई को अपनाया। पौधा खराब होने पर दूसरा पौधा मंगवाकर उसी गड्ढे में लगा दिया जाता है।