
वनस्पति तेल की मांग में दशकों बाद आएगी गिरावट, लॉकडाउन का है असर
विश्व के सबसे बड़े आयातक भारत में खाद्य तेल की खपत जनसंख्या में वृद्धि, आय के बढऩे और जगह-जगह रेस्टोरेंट्स खुलने से बाहर के खाने में बेतहाशा वृद्धि के चलते पिछले दो दशकों से अधिक समय में तिगुनी हो गई है। अधिकांश ट्रेड और इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारी इस समय इस बात पर सहमत हैं कि भारत की वनस्पति तेल की मांग, मूल रूप से पॉम ऑयल और सोया ऑयल की मांग पिछले साल के 23 मिलियन टन के मुकाबले गिर जाएगी।
कुछ डीलर्स का कहना है कि लॉकडाउन के कारण देश की खपत कम से कम एक तिमाही तक गिर सकती है। एक प्रमुख वेजिटेबल ऑयल आयातक सनविन गु्रप के चीफ एग्जिक्यूटिव संदीप बजोरिया ने कहा, 'हमारा आंतरिक अनुमान बताता है कि 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान खाद्य तेल की मांग 4,75,000 टन गिर जाएगी।Ó
ज्यादा तला हुआ और उच्च कैलोरी वाले फूड को पसंद करने वाले भारतीयों की खपत एक महीने में 19 लाख टन खाद्य तेल की है। इसमें रेस्टोरेंट्स भी शामिल हैं, जो मुख्य रूप से पाम ऑयल का प्रयोग करते हैं। देश के कुल वेजिटेबल तेल आयात में दो-तिहाई हिस्सा पाम ऑयल का आता है। भारत अपनी वेजिटेबल तेल जरूरत का करीब दो-तिहाई आयात करता है। बजोरिया के मुताबिक, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे पॉम ऑयल उत्पादक देश भारत की मांग के अनुसार अपने आउटपुट को कम कर सकते हैं।
खाद्य तेल की सप्लाई नहीं रोकी जा सकती
खाद्य तेल उद्योग संगठन सॉल्वेंट एक्सटे्रक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि खाद्य तेल आवश्यक वस्तु है, इसलिए इसकी सप्लाई नहीं रोकी जा सकती है। कोरोनावायरस के प्रकोप की रोकथाम के मद्देनजर देश में जारी लॉकडाउन के दौरान आ रही दिक्कतों को लेकर चतुर्वेदी ने उद्योग से जुड़े लोगों को एक पत्र लिखकर खाद्य तेल का उत्पादन व आपूर्ति जारी रखने का आग्रह करते हुए कहा कि एहतियात बरतते हुए जहां तक संभव हो हमें अपनी फैक्टरियां चालू रखते हुए आपूर्ति जारी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल का उत्पादन और आपूर्ति जारी रखते समय सामाजिक दूरी का ध्यान रखा जाए और कर्मचारियों को मास्क दिया जाए।
Published on:
31 Mar 2020 12:22 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
